Yemen Crisis: यमन में भयंकर जंग और एयरस्ट्राइक, दो दिन में 154 लोगों की मौत से मचा हड़कंप

यमन में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं और सऊदी समर्थित सरकारी फौजों तथा हूती विद्रोहियों के बीच चल रही भीषण लड़ाई ने एक भयंकर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। देश के कई बड़े इलाकों जैसे Taiz, Marib, al-Jawf, Saada और बंदरगाह शहर Mokha में लगातार तोपों से गोले बरसाए जा रहे हैं और आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। पिछले 48 घंटे के दौरान इस हिंसक संघर्ष में मरने वालों का कुल आंकड़ा 154 तक पहुंच गया है, जिससे पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है। सरकारी सूत्रों ने अपनी सेना के 36 जवानों के मारे जाने की पुष्टि की है, जबकि हूती सैन्य अधिकारियों का कहना है कि सऊदी एयरस्ट्राइक और जमीनी झड़पों में उनके 118 लड़ाके मारे गए हैं।
विस्थापन का बढ़ता संकट और राहत शिविरों पर दबाव
मानवीय मामलों की रिपोर्ट देने वाली वेबसाइट reliefweb.int के अनुसार, सितंबर की शुरुआत से लेकर अब तक इस खतरनाक संघर्ष की वजह से 1,30,000 से अधिक लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसमें Taiz शहर अकेले ऐसा केंद्र बन गया है जहां कुल विस्थापन का 60 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है। लोग अपना सब कुछ पीछे छोड़कर खुले आसमान के नीचे या अस्थाई कैंपों में रहने को मजबूर हैं, जिससे सहायता संगठनों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
हूती प्रवक्ता का बयान और मोखा बंदरगाह पर हमला
हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने जानकारी दी कि सऊदी अरब ने पिछले 24 घंटे के भीतर 28 बार हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में F-15 और Typhoon फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया जिन्हें Khamis Mushait और Taif एयरबेस से उड़ाया गया था। इससे पहले मंगलवार को लाल सागर के बेहद अहम बंदरगाह शहर Mokha पर एक भीषण एयरस्ट्राइक हुई, जिसमें 6 आम नागरिकों की जान चली गई। मरने वालों में 2 बच्चे और 1 महिला भी शामिल थी, जबकि इस हमले में 8 अन्य लोग बुरी तरह घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हूती विद्रोहियों ने हाल ही में यमन की पूरी लाल सागर तटरेखा और बेहद रणनीतिक Bab al-Mandab Strait पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया है। यमन के प्रधानमंत्री Shaya al-Zindani ने मौजूदा हालात को देश के लिए बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है।
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
यह लड़ाई अब यमन की सीमाओं से बाहर निकलकर सीधे तौर पर दूसरे देशों तक फैलती नजर आ रही है। मंगलवार को सऊदी अरब के Najran इलाके में खतरे के सायरन बज उठे और राजधानी Riyadh को निशाना बनाकर भी हमले की खबरें सामने आईं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रवक्ता Babar Baloch ने चेतावनी दी है कि यदि हिंसा का यह दौर इसी तरह जारी रहा, तो अगले 3 महीने के भीतर 1,00,000 और लोग बेघर हो सकते हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि हजारों लोग जान बचाने के लिए छोटी नावों के जरिए Djibouti और Somalia की तरफ पलायन करने की कोशिश कर रहे हैं। इन तमाम घटनाओं के बीच G7 देशों ने हूती सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने की कड़ी मांग की है और ईरान से कहा है कि वह इस गुट को मिलने वाली मदद पर रोक लगाए। दूसरी तरफ, ब्रिटेन और फ्रांस ने सऊदी अरब को सैन्य समर्थन देने का ऐलान किया है, हालांकि फ्रांस ने साफ किया है कि उसकी इस मदद का मतलब सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल होना नहीं है।