Yemen Crisis: यमन में हूती विद्रोहियों की बड़ी जीत पर ईरान का बड़ा बयान, कहा यह सालों की मेहनत का फल है.

यमन के हालातों को लेकर इस समय मिडिल ईस्ट में हलचल बहुत ज्यादा तेज हो गई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Hossein Mohebbi ने 12 सितंबर 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि यमन में अंसारुल्लाह यानी हूती विद्रोहियों को जो बड़ी सफलता मिली है, वह पिछले कई सालों के कड़े संघर्ष और प्रतिरोध का नतीजा है। इस बयान के सामने आने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य तनाव काफी बढ़ गया है और दुनिया भर की नजरें इस इलाके पर टिक गई हैं।
यमन के तटीय इलाकों पर कब्ज़ा और सामरिक महत्व
हूती लड़ाकों ने पिछले कुछ समय में अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए यमन के पश्चिमी तट पर बहुत बड़े इलाके अपने नियंत्रण में ले लिए हैं। इनमें रणनीतिक रूप से बेहद अहम बंदरगाह शहर Al-Mokha यानी मोचा और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित Mayyun Island यानी परिम द्वीप शामिल है। इसके अलावा, रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि हूती बलों ने इसी समुद्री गलियारे में स्थित Greater Hanish और Lesser Hanish द्वीपों पर भी अपना कब्जा जमा लिया है। यह पूरा समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार, खासकर कच्चे तेल के परिवहन के लिए दुनिया के सबसे अहम रास्तों में से एक माना जाता है।
ईरान के शीर्ष नेतृत्व का खुला समर्थन
ईरान की सरकार ने इन सैन्य विकास और सफलताओं का खुलकर स्वागत किया है। ईरान के पहले उपराष्ट्रपति Mohammad Reza Aref ने इन जीतों की सराहना करते हुए एक मजबूत इस्लामिक आर्थिक और राजनीतिक गुट बनाने की बात कही, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर स्वतंत्रता को पक्का किया जा सके। इसके अलावा, ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार Mohammad Mokhber ने कहा कि हूती विद्रोहियों की यह जीत उनकी अपनी घरेलू ताकत और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कड़े प्रतिरोध ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को एक बड़ी मुश्किल स्थिति में ला दिया है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने यमन की नाकाबंदी को तुरंत खत्म करने की मांग की है और आपसी बातचीत के लिए अपना समर्थन देने की पेशकश भी की है।
वैश्विक शिपिंग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा
यमन में चल रहे इन घटनाक्रमों की वजह से पूरे इलाके में अस्थिरता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने इस बात पर चिंता जताई है कि बाब अल-मंदेब पर हूती नियंत्रण से वैश्विक नौवहन और तेल आपूर्ति को बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले इस रास्ते पर संकट आने से दुनिया भर के देशों की टेंशन बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत Hans Grundberg ने भी चेतावनी दी है कि यह बढ़ता हुआ तनाव क्षेत्रीय के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी बहुत गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।
सऊदी अरब की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय संघर्ष
यह पूरा संघर्ष सऊदी अरब के साथ चल रहे पुराने तनाव से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। सऊदी अरब ने इन हमलों के जवाब में कई प्रांतों में हवाई हमले किए हैं, जिसमें Al-Mokha Airport का इलाका भी शामिल है। इसके अलावा, एक हालिया ड्रोन हमले की वजह से सऊदी अरब की मुख्य क्रॉस-कंट्री ऑयल पाइपलाइन को अचानक बंद करना पड़ा था, जिसके पीछे हूती ताकतों का हाथ होने का शक जताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ जानकारों का यह भी आरोप है कि ईरान द्वारा दी जाने वाली हथियारों की मदद और सलाह के कारण ही हूती बलों को लाल सागर के तट पर अपने पैर फैलाने में आसानी हुई है। हालांकि अमेरिका ने साफ किया है कि उसकी तरफ से अभी सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप करने की कोई योजना नहीं है।