Yemen Crisis: यमन में गहराया संकट, संयुक्त राष्ट्र ने होती विद्रोहियों पर लगाया मानवीय सहायता रोकने का गंभीर आरोप

यमन में चल रहे भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है जहाँ संयुक्त राष्ट्र यानी UN ने होती (Houthi) ताकतों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये विद्रोही अंतरराष्ट्रीय मदद को लोगों तक पहुँचने से लगातार रोक रहे हैं, जिससे वहाँ का मानवीय संकट और ज्यादा खतरनाक रूप ले चुका है। इस मुश्किल समय में आम जनता को खाने-पीने की चीजें, दवाइयां, साफ़ पानी और पोषण से जुड़ी सेवाएं मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लाखों लोगों की जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
फंड की भारी कमी और विस्थापन का संकट
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने 18 सितंबर 2026 को यह पुष्टि की थी कि यमन के लिए मांगे गए कुल मानवीय फंड का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पाया है। पैसों की इस कमी के कारण राहत कार्यों को चलाने में बहुत परेशानी हो रही है। मोखा में 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर' की एक सुपरवाइज़र सारा अहमद ने इस स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि वहाँ हालात बहुत ज्यादा खराब हैं और लोगों को तुरंत मदद की जरूरत है। लड़ाई इतनी बढ़ गई है कि इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो हफ्तों में ही करीब 112,000 लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरी जगह भागना पड़ा है।
जिबूती की तरफ भाग रहे शरणार्थी और सुरक्षा चिंताएं
यमन की इस खौफनाक स्थिति से बचने के लिए लगभग 3,000 शरणार्थी समंदर के रास्ते से जिबूती देश पहुंच चुके हैं। जिबूती सरकार भी आने वाले समय में करीब 10,000 लोगों के और आने की आशंका को देखते हुए पूरी तैयारी कर रही है। इससे पहले 16 सितंबर 2026 को हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक जरूरी बैठक में ब्रिटेन की प्रतिनिधि केट फोस्टर ने दो टूक कहा था कि जब तक होती विद्रोही अपनी फौजी कार्रवाइयों, सऊदी अरब पर हमलों और राहत कार्यों में रुकावट डालना बंद नहीं करते, तब तक शांति आना नामुमकिन है। ब्रिटिश सरकार के एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इस बारे में UK government statement में पूरी जानकारी दी गई है और यमन में रोकी गई मानवीय मदद को तुरंत बहाल करने की मांग की गई है। साथ ही हिरासत में लिए गए सभी UN, कूटनीतिक और राहत कर्मियों को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा करने के लिए भी कहा गया है।
आम नागरिकों की मौत और राहत कर्मियों की सुरक्षा
संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव खालिद खियारी ने भी सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए बताया था कि सितंबर महीने की शुरुआत से हुई लड़ाई में अब तक 40 आम नागरिकों की जान जा चुकी है। इन मृतकों में आधे यानी 50 प्रतिशत सिर्फ महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जो इस युद्ध की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। इन डरावने हालातों के बीच संयुक्त राष्ट्र की तमाम एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उनका मुख्य जोर इस बात पर है कि किसी तरह राहत कार्यों से जुड़े कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जरूरतमंद भूखे-प्यासे लोगों तक बिना किसी रुकावट के सहायता पहुंचाई जा सके।