यमन: 'डॉन ऑफ यमन' अभियान में सरकारी सेना की बड़ी बढ़त, तइज़ में हूतियों को भारी नुकसान

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने दक्षिणी तइज़ प्रांत में जारी भीषण संघर्ष के बीच हूती विद्रोहियों को करारी शिकस्त देने का दावा किया है। यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी द्वारा 5 अक्टूबर, 2026 को शुरू किए गए 'डॉन ऑफ यमन' सैन्य अभियान का हिस्सा है। इस बड़े ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य राजधानी सना पर दोबारा कब्जा करना और देश में सरकारी संस्थानों को बहाल करना है।
सरकारी सेना के अनुसार, इस अभियान के दौरान हूतियों को भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। सेना ने जानकारी दी कि केवल एक दिन की कार्रवाई में ही करीब 100 हूती लड़ाके मारे गए और 150 अन्य घायल हुए। इसके अलावा, सरकारी बलों ने पांच ड्रोन मार गिराए और छह सैन्य वाहनों सहित एक टैंक को पूरी तरह नष्ट या क्षतिग्रस्त कर दिया है। तइज़ मिलिट्री एक्सिस ने पुष्टि की है कि दक्षिणी जाइंट्स ब्रिगेड और नेशन शील्ड बलों के सहयोग से सरकारी सैनिकों ने हयफान जिले के रणनीतिक स्थानों जैसे जबल अल-मंज़रा, अल-अशारिफ और धिबन पर फिर से नियंत्रण पा लिया है। यह बढ़त पश्चिमी तट और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के पास के महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक भी फैली हुई है।
युद्ध के बीच गहराता मानवीय संकट
दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने सरकार के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें 'काल्पनिक जीत' करार दिया है। हूतियों का कहना है कि उनकी सेना अपनी स्थिति पर मजबूती से टिकी हुई है और उन्होंने सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थन वाली सरकारी सेना के 200 से अधिक जवानों को नुकसान पहुँचाया है।
इस सैन्य टकराव का सबसे बुरा असर आम जनता पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, हिंसा के कारण करीब 1.84 लाख लोग नए सिरे से विस्थापित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हिंसा में इस अचानक वृद्धि पर गहरी चिंता जताई है। वहीं, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने चेतावनी दी है कि लगातार जारी लड़ाई की वजह से यमन के कई हिस्सों में हर चार में से तीन परिवार भुखमरी का सामना कर रहे हैं। तइज़ शहर इस समय संघर्ष का मुख्य केंद्र बन गया है, जहाँ सितंबर के अंत से हिंसा इतनी बढ़ी है कि एक हफ्ते के भीतर दैनिक हताहतों की संख्या 8 से बढ़कर 109 तक पहुँच गई है।