यमन में बढ़ती हिंसा के बीच एडन के अल-फिरदौस कैंप में शरण ले रहे हैं विस्थापित परिवार
यमन में बढ़ती हिंसा के कारण हजारों लोग बेघर हुए हैं। एडन के अल-फिरदौस कैंप में शरणार्थियों की भीड़ बढ़ रही है।

एडन (यमन): यमन में जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में परिवार अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं। एडन शहर के बाहरी इलाके में स्थित रस इमरान के अल-फिरदौस विस्थापन कैंप में अब शरणार्थियों की भीड़ बढ़ती जा रही है। 25 अक्टूबर 2026 की हवाई तस्वीरों से पता चला है कि यहाँ टेंटों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिनमें हिंसा से बचकर आए लोग रह रहे हैं।
यमन में मानवीय संकट सितंबर 2026 की शुरुआत से काफी गहरा गया है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के आंकड़ों के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2026 तक देश भर में 2 लाख 68 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। एडन में विस्थापितों की संख्या 7 अक्टूबर के बाद दोगुनी से ज्यादा हो गई है और यह आंकड़ा 42 हजार को पार कर गया है। वहीं लहेज में करीब 67 हजार लोग रह रहे हैं।
UNHCR की रिपोर्ट बताती है कि 1 अगस्त से 17 अक्टूबर के बीच सबसे ज्यादा विस्थापन ताइज़ से हुआ, जहाँ से 76 प्रतिशत लोग निकले। इसके बाद लहेज से 23 प्रतिशत और एडन से 13 प्रतिशत लोग विस्थापित हुए। यह स्थिति तब बिगड़ी जब 5 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने अनसर अल्लाह बलों के खिलाफ जवाबी हमला शुरू किया।
देश में हालात बेहद खराब हैं और 2 करोड़ 20 लाख से ज्यादा लोगों को तत्काल मदद की जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव है और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने बताया कि फंडिंग की कमी 9 मिलियन डॉलर से बढ़कर 31 मिलियन डॉलर हो गई है। इस बीच हैजा के मामले बढ़ रहे हैं और उपचारात्मक भोजन की कमी हो गई है। ताइज़ में रास्ते बंद होने की वजह से यूनिसेफ की रसद पहुँचाना मुश्किल हो रहा है।
मदद के लिए यूरोपीय आयोग ने 23 अक्टूबर 2026 को 22.5 मिलियन यूरो की अतिरिक्त सहायता देने का वादा किया है। IOM के मिशन चीफ अब्दुसत्तोर एसोएव ने कहा कि विस्थापन का पैमाना इतना बड़ा है कि वर्तमान राहत प्रयास कम पड़ रहे हैं।
दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डॉ. रशाद मोहम्मद अल-अलीमी ने 19 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से औपचारिक अनुरोध किया है। उन्होंने नागरिकों को होने वाले गंभीर खतरों का हवाला देते हुए हूती मिलिशिया को आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग की है।