यमन में फिर भड़की जंग: 2 लाख से ज्यादा लोग बेघर, भुखमरी और बीमारियों का बढ़ा खतरा

Nura Basta8 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन में फिर भड़की जंग: 2 लाख से ज्यादा लोग बेघर, भुखमरी और बीमारियों का बढ़ा खतरा

यमन में एक बार फिर युद्ध की आग दहक उठी है, जिसने आम नागरिकों का जीवन नरक बना दिया है। ईरान समर्थित हूती बलों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी सैनिकों के बीच हिंसक झड़पों के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन शुरू हो गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि सितंबर 2026 से अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, लेकिन उनके पास सुरक्षित ठिकाना नहीं है।

इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के आंकड़ों के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2026 तक कुल 2,01,217 लोग विस्थापित हो चुके हैं। इसमें से सबसे बड़ी संख्या यानी 1,97,755 लोग केवल सितंबर के महीने में ही बेघर हुए हैं। यह संकट केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि 10 अलग-अलग प्रांतों में फैला हुआ है। सबसे बुरा हाल ताइज़ (Ta'iz) का है, जहाँ से 1,14,708 लोग पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा लहज, अदन, अब्यान और अल हुदैदा में भी हजारों लोग बेघर हुए हैं। हालात इतने बदतर हैं कि करीब 3,700 लोग समुद्र के रास्ते जिबूती भाग गए हैं।

इलाज और खाने की भारी किल्लत, फंड की कमी ने बढ़ाई मुसीबत

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युद्ध के साथ-साथ यमन अब स्वास्थ्य और भुखमरी के दोहरे संकट से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि सड़कों के बंद होने से मानवीय सहायता उन लोगों तक नहीं पहुँच पा रही है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे हैजा (cholera) के मामलों में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। साथ ही मलेरिया, डेंगू और खसरे जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की चेतावनी है कि कुछ इलाकों में हर चार में से तीन परिवार भूख से जूझ रहे हैं। पूरे देश में करीब 1.83 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट तो और भी डराने वाली है, जिसमें कहा गया है कि हाल ही में जांच किए गए बच्चों में से हर चौथा बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है।

इस पूरी त्रासदी के बीच सबसे बड़ी चुनौती फंड की कमी है। 2026 के मानवीय सहायता प्लान के लिए 2.16 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 21% फंड ही जुटाया जा सका है। IOM की महानिदेशक एमी पोप ने चेतावनी दी है कि फंड की इस कमी के कारण लोगों को जरूरी भोजन और सिर छुपाने के लिए छत देना मुश्किल होता जा रहा है।

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