यमन में फिर भड़की हिंसा, 72 घंटे में 18,500 लोग बेघर, खाने और रहने की भारी किल्लत

यमन में चल रहे संघर्ष ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है, जिससे आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह तबाह हो गई है। International Organization for Migration (IOM) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लड़ाई तेज होने की वजह से विस्थापितों की संख्या में हर घंटे इजाफा हो रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सरकारी समर्थक ताकतों के बीच चल रही खूनी झड़पों ने आम नागरिकों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि हजारों परिवारों को सुरक्षित ठिकानों की तलाश में दर-दर भटकना पड़ रहा है।
अचानक तेज हुई हिंसा और विस्थापन का संकट
मिली जानकारी के अनुसार, 3 सितंबर 2026 को संघर्ष में अचानक तेजी आई, जिसके बाद तैज़ (Taiz) और अल-होदेइदाह (Al-Hodeidah) गवर्नरट से लगभग 18,500 लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। IOM के विस्थापन ट्रैकिंग मैट्रिक्स के अनुसार, पश्चिमी तट और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के पास हिंसा बढ़ने से पिछले कुछ दिनों में 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि जब से यह लड़ाई शुरू हुई है, तब से कुल मिलाकर लगभग 900 लोग मारे गए या घायल हुए हैं। इस हिंसा ने मकबनाह, अल माअफर और जबल हबाशी जैसे इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
शहरी इलाकों पर पड़ रहा भारी दबाव
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पहले से विस्थापित हुए परिवारों को एक बार फिर से पलायन करना पड़ रहा है। अल मोखा (Al Mokha) और मावजा (Mawza) जैसे बड़े शहरी केंद्रों पर अचानक पहुंचे नए परिवारों का भारी दबाव देखने को मिल रहा है। इन बेघर लोगों के पास न तो खाने के लिए कुछ है और न ही रहने के लिए कोई छत। उन्हें यह भी नहीं पता कि वे अपने घर वापस कब लौट पाएंगे। IOM के यमन में मिशन प्रमुख अब्दुसत्तोरो एसोएव ने बताया कि केवल 30 अगस्त से 5 सितंबर 2026 के बीच एजेंसी ने 2,250 परिवारों यानी करीब 13,500 लोगों को विस्थापित होते देखा।
लाखों लोग पहले से हैं बेघर
आंकड़ों पर गौर करें तो 1 जनवरी से 5 सितंबर 2026 के बीच कुल 5,063 परिवार यानी 30,378 लोग कम से कम एक बार विस्थापित होने को मजबूर हुए। इन ताजा आंकड़ों के जुड़ने से यमन का मानवीय संकट और भी ज्यादा गहरा गया है। साल 2026 के लिए यमन में कुल आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की संख्या का अनुमान 5.2 मिलियन लगाया गया है। स्थानीय प्रशासन और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन फ्रंटलाइन इलाकों के पास रास्ते सुरक्षित न होने के कारण राहत कार्यों में भारी रुकावट आ रही है। इस पूरी स्थिति के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ReliefWeb Report पर जा सकते हैं।