यमन में गहराया विस्थापन संकट, अगस्त से अब तक 3.13 लाख से ज्यादा लोग बेघर
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक यमन में अगस्त से 3.13 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। तइज़ में सबसे ज्यादा असर है और नागरिक हताहतों की संख्या बढ़ रही है।

यमन: संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 की शुरुआत से अब तक यमन में 3.13 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। इस पूरे संकट का सबसे बुरा असर तइज़ गवर्नरेट में देखने को मिल रहा है, जहां कुल विस्थापितों में से 40 प्रतिशत से अधिक लोग शामिल हैं।
मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने अगस्त से अब तक 281 नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की है। इनमें 69 लोगों की मौत हो गई है और 212 लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन हताहतों में एक तिहाई से ज्यादा बच्चे हैं।
हूती बलों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच जारी लड़ाई और सप्लाई रूट बंद होने की वजह से आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोग भोजन, साफ पानी, दवाइयों और ईंधन की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं।
पश्चिम तट और दक्षिणी मोर्चों पर सैन्य अभियानों में तेजी आई है, जिससे मानवीय सहायता पहुँचाने में बड़ी बाधा आ रही है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) विस्थापन के आंकड़ों पर नजर रख रहा है और उसने तइज़, अदन, लहज और मारिब जैसे प्रभावित इलाकों में मोबाइल मेडिकल टीमें तैनात की हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले और अस्थायी शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों के बीच संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। तइज़ के स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि जारी नाकेबंदी और सशस्त्र संघर्ष से नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं जैसे संवेदनशील लोगों को बड़ा खतरा है।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मानवीय एजेंसियों ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि वे नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करें। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और मानवीय सहायता के लिए सुरक्षित और निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है।