यमन में विस्थापन 2 लाख पार: संघर्ष तेज़ होने से घर छोड़ने को मजबूर लोग

यमन: यमन में सितंबर से शुरू हुई लड़ाई के तेज़ होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय प्रवास संगठन (IOM) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ अब तक 2 लाख 13 हज़ार से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। यानी हर दिन गिनती बढ़ रही है और राहत की ज़रूरत भी उसी रफ़्तार से बढ़ रही है।
IOM के मुताबिक़ 7 अक्टूबर तक की पुष्ट संख्या 2 लाख 1 हज़ार 217 थी। सितंबर के मध्य में यह आंकड़ा लगभग 76 हज़ार था, जो महीने के अंत तक 1 लाख 45 हज़ार से ऊपर पहुंच गया। यह उछाल बताता है कि हालात कितनी तेज़ी से बिगड़े।
विस्थापन का असर यमन के 10 गवर्नरेट पर पड़ा है। IOM के अनुसार सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाका तइज़ है, उसके बाद लाहज और अदन आते हैं। संगठन के यमन में चीफ़ ऑफ़ मिशन अब्दुसत्तार एसोएव ने कहा है कि भागने वालों में ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं, जो इस संकट की मानवीय क़ीमत को साफ़ दिखाता है।
समुद्र के रास्ते जिबूती तक पहुंचे लोग
देश के भीतर विस्थापन के अलावा करीब 3,700 लोग समुद्र के रास्ते जिबूती पहुंचे हैं। वे थके हुए और संसाधनों से लगभग खाली हाथ हैं। बचाव के लिए निकले इन परिवारों के सामने आगे क्या होगा, इसकी कोई साफ़ तस्वीर नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के उप महासचिव मोहम्मद याह्या ने 9 अक्टूबर को सुरक्षा परिषद को बताया कि हालात पहले से काफ़ी बिगड़ चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अब भी कदम नहीं उठाए गए तो इसकी कीमत जानों में चुकानी पड़ेगी। विस्थापित परिवारों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत खाने और सिर छुपाने की जगह की है।
भूख का संकट भी गहराता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार यमन में 1 करोड़ 80 लाख से ज़्यादा लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, और पांच साल से कम उम्र के 22 लाख से अधिक बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं। IOM की महानिदेशक एमी पोप ने कहा कि विस्थापित लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं और उनके पास कहीं सुरक्षित जाने की जगह नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की यमन के लिए मानवीय अपील में अब तक केवल 22 प्रतिशत धनराशि ही जुटी है।
उधर यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने तइज़ में एक बड़े स्वास्थ्य संकट की आशंका जताई है। ज़रूरी सामान की रुकावट और पहले से कमज