Yemen Crisis: यमन में बढ़ते संघर्ष के कारण सिर्फ 24 घंटों में 1,400 लोग देश छोड़कर जिबूती भागे.

Sushma Kumari13 September 20262 min read12 viewsYemen
Yemen Crisis: यमन में बढ़ते संघर्ष के कारण सिर्फ 24 घंटों में 1,400 लोग देश छोड़कर जिबूती भागे.

यमन में चल रहे भीषण संघर्ष के कारण हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं और आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, जिबूती के अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्री इल्यास मौसा दावालेह ने रिपोर्ट किया कि केवल 24 घंटे के भीतर लगभग 1,400 लोगों ने यमन छोड़कर जिबूती में शरण ली है। बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास हाउती लड़ाकों के नियंत्रण मजबूत करने के बाद से लड़ाई में काफी तेजी आई है, जिसकी वजह से यह बड़ा पलायन देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने के लिए मजबूर हैं।

समुद्र में फंसे शरणार्थी और राहत अभियान

इससे पहले 11 सितंबर 2026 को एक बड़ा बचाव अभियान चलाया गया था, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 500 शरणार्थी ओबोक के तटीय शहर पहुंचे थे। ये सभी लोग समुद्र में फंस गए थे क्योंकि इनकी नावों का ईंधन खत्म हो गया था। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन यानी IOM की मानवीय प्रतिक्रिया समन्वयक सफिया इब्राहिम ने इन शरणार्थियों के आने की पुष्टि की और साथ ही यह भी चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में और अधिक लोगों के विस्थापित होने की पूरी आशंका है। IOM ने पहले ही 11 सितंबर को बताया था कि पिछले एक हफ्ते के दौरान यमन में चल रहे संघर्ष की वजह से कम से कम 46,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और विस्थापन की रफ्तार

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई महीने से लेकर अब तक यमन में कम से कम 76,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि पिछले सात दिनों में विस्थापन की यह रफ्तार चार गुना बढ़ गई है। सैन्य स्थिति में बड़ा बदलाव 10 सितंबर 2026 को आया, जब हाउती बलों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 11 सितंबर तक इन लड़ाकों ने तटीय इलाकों और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास मय्युन द्वीप समेत आसपास के कई इलाकों पर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया। इस सैन्य हमले के कारण मकबनह, जबल हबाशी और अल-माफर जिलों के पूरे के पूरे गांव खाली हो गए और लोगों को पलायन करना पड़ा।

सहायता पहुंचाने में आ रही भारी मुश्किलें

IOM की महानिदेशक एमी पोप ने बताया कि कई परिवार एक बार नहीं बल्कि बार-बार विस्थापन का शिकार हो रहे हैं, जिससे जरूरतमंदों तक जीवन रक्षक सहायता पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है। मार्च 2026 तक संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने जिबूती में पहले से पंजीकृत 36,000 से अधिक शरणार्थियों और शरण चाहने वालों का रिकॉर्ड दर्ज किया था, जिनमें मुख्य रूप से सोमालिया, इथोपिया और यमन के लोग शामिल हैं। यमन में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं और आम नागरिकों का जीवन पूरी तरह से संकट में आ गया है।

Share:

Comments

Leave a comment