ताइज़ की घेराबंदी एक युद्ध अपराध है: मनामा डायलॉग में बोलीं यमन की विदेश मंत्री
मनामा डायलॉग में यमन की विदेश मंत्री अफ़राह अल-ज़ौबा ने हूती मिलिशिया की घेराबंदी को युद्ध अपराध बताया और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की।

मनामा (बहरीन): यमन की विदेश और प्रवासी मामलों की मंत्री डॉ. अफ़राह अल-ज़ौबा ने हूती मिलिशिया द्वारा ताइज़ की जारी घेराबंदी को 'युद्ध अपराध' करार दिया है। बहरीन में 31 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2026 तक आयोजित 22वें आईआईएसएस (IISS) मनामा डायलॉग के दौरान उन्होंने यह बात कही।
क्षेत्रीय सुरक्षा की बुनियाद पर चर्चा के दौरान डॉ. अल-ज़ौबा ने कहा कि एक स्थिर यमन के बिना स्थायी क्षेत्रीय सुरक्षा संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थिरता तभी आएगी जब पूरे यमन के क्षेत्र में राज्य के अधिकार पूरी तरह बहाल होंगे और वैध संस्थान हथियारों व युद्ध-शांति के फैसलों पर एकमात्र नियंत्रण रखेंगे।
विदेश मंत्री ने ताइज़ की नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि परिवहन मार्गों को स्थायी और सुरक्षित रूप से फिर से खोलने के लिए दुनिया को आगे आना होगा।
समुद्री सुरक्षा पर बात करते हुए उन्होंने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य, लाल सागर, अदन की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों की सुरक्षा की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक, इन जलमार्गों को सुरक्षित रखने के लिए क्षेत्रीय खतरे के स्रोत को खत्म करना होगा।
डॉ. अल-ज़ौबा ने ईरानी शासन द्वारा हूती मिलिशिया को दी जा रही मदद को बंद करने, हथियारों के प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने और यमन के सरकारी संस्थानों को मजबूत करने की मांग की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों के पैनल के उन निष्कर्षों का भी हवाला दिया, जिनमें ईरान, हिजबुल्लाह और विभिन्न इराकी सशस्त्र समूहों द्वारा हूतियों को विदेशी समर्थन मिलने की बात दर्ज है।
शिखर सम्मेलन के इतर विदेश मंत्री ने अमेरिकी विदेश विभाग के निकट पूर्व एशियाई मामलों के सहायक सचिव डोनाल्ड ब्लोम के साथ राज्य संस्थानों को मजबूत करने पर चर्चा की। इसी फोरम में शामिल सऊदी उप विदेश मंत्री वलीद अल-खैरिजी ने भी हूतियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री नेविगेशन को दिए जा रहे खतरों और उनके बढ़ते आक्रामक रुख की निंदा की।