तैज़ में हूती सप्लाई लाइन रोकने को सरकारी सेना ने अल-सरारी गांव घेरा
यमनी सरकारी सेना ने अल-सरारी गांव की घेराबंदी कर हूती विद्रोहियों की सप्लाई लाइन काटने की कोशिश की है।

तैज़ (यमन): यमनी सरकारी सेना और पॉपुलर रेजिस्टेंस के लड़ाकों ने तैज़ प्रांत के अल-सरारी गांव के प्रवेश द्वार की घेराबंदी कर दी है। 7 नवंबर 2026 को मिली जानकारी के मुताबिक, इस रणनीतिक कदम का मकसद इलाके में हूती विद्रोहियों की एक प्रमुख सप्लाई लाइन को पूरी तरह से काटना है।
यह सैन्य कार्रवाई 'डॉन ऑफ यमन' (फज्र यमन) अभियान का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 5 अक्टूबर 2026 को हुई थी। सरकारी बलों ने अल-सरारी के अलावा अल-निदानी गांव, सनमत क्षेत्र के बड़े हिस्सों और धि अल-बरह के रिबात अल-कर्न इलाके पर भी अपना नियंत्रण फिर से स्थापित कर लिया है।
इस बीच अल-शकाब, अल-अकरुद और साबर फ्रंट सहित कई मोर्चों पर भीषण झड़पें जारी हैं। सैन्य अधिकारियों ने दावा किया है कि इन मुठभेड़ों में हूती लड़ाकों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है और उनके काफी सैन्य उपकरणों को नष्ट कर दिया गया है।
दूसरी ओर, तैज़ में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को अल-वाज़िया जिला के अल-हदारा बाजार पर एक बैलिस्टिक मिसाइल हमला हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए। यमनी सरकार और हूती मिलिशिया दोनों ने इस हमले के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं।
रणनीतिक रूप से तैज़ का महत्व बहुत ज्यादा है क्योंकि यह इब्ब और सना जैसे उत्तरी प्रांतों को लहज और अदन जैसे दक्षिणी क्षेत्रों से जोड़ता है। साथ ही यह बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के करीब स्थित है।
लगातार जारी संघर्ष ने प्रांत में गहरा मानवीय संकट पैदा कर दिया है। यहां करीब 15 लाख लोग भोजन, दवा और पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। प्रांतीय अधिकारियों ने इसे एक विनाशकारी घेराबंदी बताया है, जिससे अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाएं लगभग ठप होने की कगार पर हैं।