बाब अल-मन्डेब के पास सरकारी बलों की बड़ी जीत, रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा

Nura Basta9 October 20262 min read0 viewsYemen
बाब अल-मन्डेब के पास सरकारी बलों की बड़ी जीत, रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा

यमन में तनाव एक बार फिर चरम पर है और इस बीच सरकारी बलों ने एक बड़ी कामयाबी का दावा किया है। 9 अक्टूबर 2026 को मिली जानकारी के मुताबिक, सरकारी सेना ने बाब अल-मन्डेब जलडमरूमध्य के पास स्थित अर्दी कैंप की निगरानी करने वाली महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला को मुक्त करा लिया है। यह जीत उस बड़े हमले का हिस्सा है जो 5 से 7 अक्टूबर के बीच शुरू किया गया था।

इस पूरे ऑपरेशन में सऊदी नेतृत्व वाले 'कोएलिशन टू सपोर्ट लेजिटिमेसी इन यमन' ने सरकारी सैनिकों का पूरा साथ दिया। सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एरयानी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी बलों ने अब रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाब अल-मन्डेब समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण प्रभावी रूप से स्थापित कर लिया है। इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने मोचा के पश्चिमी बंदरगाह शहर, धुबाब शहर और बाब व हदीद जैसे बस्तों को भी वापस पा लिया है।

सऊदी अरब का कड़ा रुख और सैन्य कार्रवाई

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इस सैन्य अभियान की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने 100 लड़ाकू विमानों की भागीदारी की पुष्टि की है। इन विमानों ने हूती विद्रोहियों के सैकड़ों ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं, राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी ने इस जवाबी हमले को राज्य के अधिकार को बहाल करने के लिए एक आवश्यक कदम बताया है।

दूसरी ओर, हूती आंदोलन ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है और सरकारी बलों की इन जीत को 'मनगढ़ंत' करार दिया है। हालांकि, रिपोर्ट्स बताती हैं कि 'सदर्न जाइंट्स' बल अब तेजी से बाब अल-मन्डेब के तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं।

इस बीच, सऊदी अरब ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। सऊदी ने साफ कर दिया है कि जब तक यमनी सरकार अपना पूरा नियंत्रण वापस नहीं पा लेती, तब तक हूतियों के साथ किसी भी तरह की शांति वार्ता या युद्धविराम नहीं किया जाएगा। सऊदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह 'सैन्य ब्लैकमेल' के आगे नहीं झुकेगा।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि बाब अल-मन्डेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका सीधा असर स्वेज नहर के पार होने वाले ट्रांजिट पर पड़ता है। इस बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग होनी है, जिसमें विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग हिंसा में हुई इस वृद्धि पर चर्चा कर सकते हैं।

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