यमन सेना ने सैन्य अभियान के दौरान 218 हूती लड़ाकों को ढेर कर 78 वाहन नष्ट किए
यमन सरकार की सेना ने 24 घंटे में 750 से ज्यादा ऑपरेशन चलाकर 218 हूती लड़ाकों को खत्म किया और 78 सैन्य वाहन नष्ट किए।

साना: यमन सरकार की सेना ने एक बड़े सैन्य अभियान के तहत पिछले 24 घंटों में 218 हूती लड़ाकों को खत्म कर दिया है। सेना ने बताया कि इस दौरान 750 से ज्यादा ऑपरेशन चलाए गए, जिनमें हूतियों के 78 सैन्य वाहनों को या तो पूरी तरह नष्ट कर दिया गया या उन्हें बेकार कर दिया गया।
यह कार्रवाई लगातार चल रहे उच्च तीव्रता वाले हमलों का हिस्सा है। इससे पहले 24 अक्टूबर को सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नाज़िली ने जानकारी दी थी कि 700 से अधिक टारगेट ऑपरेशन में 300 हूती लड़ाकों को ढेर किया गया था।
दबाव और हमले लगातार बढ़ रहे हैं। 22 अक्टूबर को 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के तहत सरकारी बलों ने 780 हमले किए थे। उस दिन करीब 512 लड़ाकों और 330 वाहनों को नष्ट करने की रिपोर्ट दी गई थी।
इस्तांबुल में यमन की विदेश मंत्री अफराह अल-ज़ौबा ने 25 अक्टूबर को कहा कि हूती मिलिशिया के साथ राजनयिक बातचीत विफल हो गई है। उन्होंने साफ किया कि सरकार हूतियों के निशस्त्रीकरण के लिए सैन्य अभियान जारी रखेगी।
दूसरी तरफ सुरक्षा हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने ऊर्जा प्रतिष्ठानों और रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत तीन सऊदी हवाई अड्डों पर सफल हमलों का दावा किया है। किंग खालिद एयरपोर्ट पर फिलहाल आंशिक रूप से कामकाज शुरू हो पाया है।
सऊदी अधिकारियों ने दो मिसाइलों और दो ड्रोन को रोकने की पुष्टि की है। मक्का और मदीना क्षेत्रों में इन हमलों का मलबा मिलने की बात कही गई है।
इस हिंसा का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिख रहा है। हूतियों की शत्रुता और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण अमेरिकी विदेश विभाग ने 23 अक्टूबर से आदेश जारी किया है। इसके तहत गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने को कहा गया है।
अमेरिकी कर्मियों के लिए यमन सीमा के पास के प्रांतों में यात्रा प्रतिबंधित कर दी गई है। अब किसी भी सऊदी हवाई अड्डे का उपयोग करने के लिए विशेष अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
वहीं, युद्ध के कारण मानवीय संकट गहरा गया है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने चेतावनी दी है कि ताइज़ के पास भीषण लड़ाई की वजह से 8 लाख से अधिक निवासियों तक सहायता नहीं पहुंच पा रही है।