यमन में बड़ा सैन्य झटका, हूथी विद्रोहियों ने वेस्ट कोस्ट पर किया कब्जा, शांति प्रक्रिया रुकी

यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) के सदस्य और मारिब के गवर्नर Sultan al-Arada ने 13 सितंबर 2026 को यह पुष्टि की है कि सरकारी सेना देश के पश्चिमी तट से पीछे हटने के बाद मैदान में वापसी के लिए फिर से एकजुट हो रही है। उन्होंने हूथी विद्रोहियों के हाथों हुए इस नुकसान को एक दर्दनाक झटका बताया और कहा कि हूथियों ने देश में शांति प्रक्रिया को रोक दिया है और युद्ध की स्थिति को अनिवार्य बना दिया है। इस सैन्य फेरबदल की शुरुआत 10 सितंबर 2026 को हुई थी, जब PLC के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल Tareq Saleh ने भारी हताहतों के बाद एक सुरक्षित स्थान पर वैकल्पिक कमान केंद्र बनाने का आदेश दिया था।
ईरान पर लगे गंभीर आरोप और वैश्विक व्यापार की चिंता
सेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस पूरे संघर्ष के पीछे बाहरी ताकतों का हाथ होने का दावा किया है। लेफ्टिनेंट जनरल Tareq Saleh ने सीधे तौर पर ईरान पर हूथी आक्रमण की योजना बनाने और उसमें शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है। इसके अलावा, PLC के अध्यक्ष Rashad Mohammed Al-Alimi ने 10 और 12 सितंबर को दिए अपने बयानों में इस बात पर विशेष जोर दिया कि बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab al-Mandab Strait) की सुरक्षा पूरी दुनिया के व्यापार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। दूसरी तरफ, सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के नेतृत्व वाले हूथी बलों का दावा है कि उन्होंने क्षेत्र में पूरी तरह से स्थिति को स्थिर कर लिया है।
हूथी विद्रोहियों का बड़ा कब्जा और विस्थापन का संकट
हूथी परिषद के अध्यक्ष Mahdi al-Mashat ने 10 सितंबर को ऐलान किया था कि सऊदी समर्थित ताकतों को बाहर खदेड़ने के बाद उनके सैन्य अभियान समाप्त हो चुके हैं। हूथी प्रवक्ता Yahya Sarea के अनुसार, 12 सितंबर तक हूथियों ने मोखा बंदरगाह, मायुन द्वीप और हानिश द्वीपों समेत पूरे पश्चिमी तट पर कब्जा कर लिया है, जो कुल मिलाकर लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बनता है। यह सैन्य अभियान 3 सितंबर को शुरू हुआ था, जिसके कारण सरकारी सैनिकों को पीछे धकेलते हुए लाहज के खोर ओमेइरा तक पहुंचना पड़ा। इस भारी संघर्ष और तनाव के कारण आम जनता को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और मानवीय हालात
संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई महीने के बाद से अब तक कम से कम 76,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। केवल एक दिन यानी 12 सितंबर को समाप्त हुए 24 घंटों के भीतर, 1,400 से अधिक शरणार्थी अपनी जान बचाकर जिबूती पहुंचे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत Hans Grundberg ने 11 सितंबर को चेतावनी दी थी कि यह संघर्ष एक बेहद खतरनाक चरण में पहुंच चुका है, जिससे आने वाले समय में एक नया मानवीय संकट पैदा हो सकता है। इन सबके बीच, जमीनी और हवाई संघर्ष लगातार जारी है, जहां यमन की सेना ने 12 सितंबर को अल-बायदा में हूथी ठिकानों पर 20 से अधिक हवाई हमले किए, जबकि जाइंट्स ब्रिगेड ने एक हूथी FPV हमलावर ड्रोन को गिराने का दावा भी किया है।