यमन सेना का बड़ा एक्शन: रणनीतिक बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य और मायून द्वीप पर कब्जा

यमन की सरकारी सेना ने सऊदी वायुसेना की मदद से एक बड़ा सैन्य अभियान चलाकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मायून द्वीप (पेरिम द्वीप) और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल कर लिया है। शुक्रवार तड़के शुरू हुए इस ऑपरेशन, जिसका कोडनेम 'डॉन ऑफ यमन' रखा गया था, में सरकारी बलों ने हुथी विद्रोहियों को खदेड़कर प्रमुख सैन्य ठिकानों पर अपना कब्जा जमा लिया।
इस हमले के दौरान सरकारी सैनिकों ने अल-अराधी कैंप, कोस्ट गार्ड के ऑब्जर्वेशन पोस्ट और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य की निगरानी करने वाली पहाड़ियों जैसे अहम स्थानों को अपने कब्जे में ले लिया। इस सैन्य कार्रवाई में जाइंट्स ब्रिगेड्स (Alwiya al-Amaliqa) और शील्ड ऑफ द नेशन (Dir al-Watan) जैसी विशेष इकाइयों ने मुख्य भूमिका निभाई। हालांकि हुथी लड़ाकों के हताहत होने की खबरें हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई संख्या जारी नहीं की गई है और हुथी मिलिशिया ने अभी तक इस घटना पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियान का महत्व
यमन में सऊदी अरब के राजदूत मोहम्मद अल जाबेर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस जीत की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य को "आतंकवादी हुथी मिलिशिया के अवशेषों से मुक्त" कर लिया गया है, जिसे उन्होंने यमन के लोगों और पूरे अरब जगत की जीत बताया। यह कार्रवाई राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी द्वारा 5 अक्टूबर 2026 को शुरू किए गए एक व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हुथियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस पाना और राज्य का अधिकार बहाल करना है।
गौरतलब है कि सितंबर 2026 के मध्य में सऊदी समर्थित बलों की वापसी के बाद हुथियों ने मायून द्वीप पर कब्जा कर लिया था। इस तनाव के बीच, 8 अक्टूबर को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हुथियों द्वारा सऊदी हवाई अड्डों पर किए गए हमलों के जवाब में 82 सैन्य ठिकानों पर प्रहार किया था और उनकी बैलिस्टिक मिसाइलों को नाकाम किया था। सरकारी बलों ने मोखा की ओर बढ़ते हुए हुथी ठिकानों की घेराबंदी की थी, जिसके बाद यह निर्णायक जीत हासिल हुई।