यमन: तइज़ में हुथी ठिकानों पर सेना का जोरदार हमला, सैन्य अभियान तेज

यमन में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। 7 अक्टूबर 2026 को तइज़ शहर के पश्चिमी इलाके अल-सित्तीन में तैनात यमनी सेना ने हुथी विद्रोहियों के एक जमावड़े पर मोर्टार से सटीक हमला किया। यह हमला अचानक हुआ, जिसने इलाके में हड़कंप मचा दिया। यह पूरी कार्रवाई 'फज्र यमन' नामक एक बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 5 अक्टूबर 2026 को की गई थी। यमनी प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलीमी के मुताबिक, इस ऑपरेशन का मुख्य मकसद सरकारी संस्थानों को बहाल करना और सना शहर को मुक्त कराना है।
जंग के मैदान में बढ़ी हलचल और हवाई हमले
तइज़ गवर्नरेट में इस समय युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। जबल हबशी, अल-मावासित, अल-सलव और अल-वाज़िया जैसे मोर्चों पर भीषण झड़पें जारी हैं। सरकारी गठबंधन की 'होमलैंड शील्ड फोर्सेज' ने दावा किया है कि उन्होंने जबल हबशी की सबसे ऊंची चोटी पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। वहीं, 'जायंट्स ब्रिगेड' और तइज़ एक्सिस फोर्स भी लगातार हमले कर रहे हैं। ज़मीन के साथ-साथ आसमान से भी वार हो रहा है; यमनी सरकारी विमानों ने तइज़ के दक्षिण में स्थित जबल मत्रन में हुथी ठिकानों पर भारी बमबारी की है।
दूसरी ओर, हुथी विद्रोहियों ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। उन्होंने अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इसके अलावा, उन्होंने सऊदी अरब के आभा और किंग खालिद एयरपोर्ट्स पर किए गए हमलों की जिम्मेदारी भी ली है। इस खतरे को देखते हुए सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सना में हुथी के एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
इस बढ़ती हिंसा के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। वहीं, यमन के परिवहन मंत्रालय ने अदन एयरपोर्ट पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है।