यमन की विदेश मंत्री ने हूती मिलिशिया की सैन्य ताकत और फंडिंग रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कदम उठाने की अपील की
यमनी विदेश मंत्री डॉ. अफ़राह अल-ज़ौबा ने हूती मिलिशिया की सैन्य क्षमता और फंडिंग रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कदम उठाने की अपील की है।

सना: यमन की विदेश मंत्री डॉ. अफ़राह अल-ज़ौबा ने हूती मिलिशिया के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यमन और पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए हूतियों की सैन्य क्षमता को कम करना और उनके फंडिंग के रास्तों को बंद करना बहुत जरूरी है।
क्षेत्र में तनाव बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में हूतियों ने दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला किया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए। सऊदी अरब के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बार-बार हुए हमलों के कारण फिलहाल केवल घरेलू उड़ानें ही आंशिक रूप से शुरू हो पाई हैं। इन हालातों के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब से अपने दूतावास के गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस बुला लिया है।
डॉ. अल-ज़ौबा ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह हूती बलों को हथियार और सैन्य विशेषज्ञता देकर इस संघर्ष को लंबा खींच रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान एक तरफ तो मध्यस्थता की कोशिश करता है, लेकिन दूसरी तरफ संघर्ष के एक पक्ष को हथियार दे रहा है। विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2216 को सख्ती से लागू करने और लाल सागर व बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग रास्तों को सुरक्षित करने की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र पैनलों और आधिकारिक जांच में यह बात सामने आई है कि हूती मिलिशिया मानवीय और आर्थिक संकट का फायदा उठाकर पैसा जुटा रहे हैं। वे सरकारी राजस्व को मोड़ रहे हैं और अपने ऑपरेशनों के लिए टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। इंटेलिजेंस रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि हूतियों की गतिविधियां अब सोमालिया तक फैल गई हैं, जिससे अल-शबाब जैसे उग्रवादी समूहों के साथ उनके सहयोग का डर बढ़ गया है।
सऊदी अरब अपनी सीमा की रक्षा के लिए जवाबी हमले कर रहा है। इस बीच फ्रांस, ब्रिटेन, तुर्की और मिस्र जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने सऊदी बुनियादी ढांचे और सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए रक्षा सहायता बढ़ा दी है।