सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का हमला, यमन सरकार ने की कड़ी निंदा और रियाद का समर्थन.

Nura Basta20 September 20262 min read0 viewsSaudi
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का हमला, यमन सरकार ने की कड़ी निंदा और रियाद का समर्थन.

यमन की विदेश मंत्रालय ने हाल ही में सऊदी अरब के शहरों और नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। ससना से मिली जानकारी के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने रियाद और यानबू स्थित आरामको की सुविधा को निशाना बनाकर सैन्य अभियान चलाए थे। यमन सरकार ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है और सऊदी अरब के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाई है। यमन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि वे सऊदी अरब की सुरक्षा और वहां के नागरिकों की हिफाजत के लिए उठाए जाने वाले हर कदम का समर्थन करते हैं।

हूती विद्रोहियों और ईरान की भूमिका पर बड़ा बयान

यमन सरकार ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही, ईरान पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि ईरान इस विद्रोही समूह को लगातार सैन्य समर्थन दे रहा है, जिससे उन्हें ऐसे हमले करने की ताकत मिल रही है। यमन के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे मिलकर काम करें और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने के लिए कड़े कदम उठाएं, ताकि इन विद्रोहियों को मिलने वाली मदद को रोका जा सके। इस बीच, हूती प्रवक्ता याह्या सारेई ने दावा किया कि उनके द्वारा किए गए दोनों सैन्य अभियान सफल रहे और उन्होंने यह कदम सना पर हुए हमलों के जवाब में उठाया है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया

सऊदी अरब पर हुए इन हमलों के बाद मिस्र, जॉर्डन, बहरीन और खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी ने भी इन हमलों की पुरजोर निंदा की है। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक बताया है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने न्यूयार्क में जीसीसी महासचिव जassim अल-बुदैवी से मुलाकात की और क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने नागरिकों को निशाना बनाने वाले ऐसे हमलों की आलोचना की और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।

अमेरिका और अन्य देशों की हलचल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कैंप डेविड से अचानक व्हाइट हाउस लौट आए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका यह दौरा यमन में संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार करने के लिए था। इस तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने भी अपने नागरिकों और कर्मचारियों के लिए चेतावनी जारी कर दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते इस तनाव ने एक बार फिर से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जहां ईरान, यमन और अमेरिकी हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस पूरी स्थिति की विस्तृत जानकारी के लिए आप यमन विदेश मंत्रालय के आधिकारिक एक्स पोस्ट पर जा सकते हैं।

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