यमन: 'डॉन ऑफ यमन' अभियान में सरकारी बलों की बड़ी जीत, तइज़ की रणनीतिक चोटियों पर कब्जा

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने 'डॉन ऑफ यमन' सैन्य अभियान के तहत एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। सरकारी बलों ने पश्चिमी तइज़ के उन महत्वपूर्ण पहाड़ी इलाकों पर अपना नियंत्रण कर लिया है, जहाँ से पूरे तटीय क्षेत्र पर नज़र रखी जा सकती है। यह रणनीतिक बढ़त हूती विद्रोहियों के खिलाफ चल रहे युद्ध में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।
इस बड़े हमले की शुरुआत 5 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी ने की थी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश की सरकारी संस्थाओं को फिर से बहाल करना, राजधानी सना को आजाद कराना और हूती तख्तापलट को पूरी तरह समाप्त करना है। सरकारी बलों, जिनमें यमनी सेना, नेशनल शील्ड फोर्स और सदर्न जायंट्स ब्रिगेड शामिल हैं, ने अब तक हूती ठिकानों पर 2,103 हमले किए हैं, जिनमें करीब 1,860 लड़ाके मारे गए हैं।
तटीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
ताजा सैन्य कार्रवाई में सरकारी सेना ने कहबूब पहाड़ों पर कब्जा कर लिया है, जो लाहिज और तइज़ दोनों प्रांतों में फैले हुए हैं। इन पहाड़ों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ से महत्वपूर्ण बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य (Strait) की निगरानी की जा सकती है। इसके अलावा, 6 अक्टूबर को अल-वाज़िया जिले में अल-मंसुरा की पहाड़ियों पर भी नियंत्रण पाया गया और जबाल हबाशी जिले में एक महत्वपूर्ण चोटी को सुरक्षित किया गया।
इस पूरे ऑपरेशन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन को हवाई समर्थन मिल रहा है। मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी के अनुसार, 7 अक्टूबर को ही 100 लड़ाकू विमानों ने हूतियों के 324 ठिकानों को तबाह कर दिया। वहीं, अमेरिका इस अभियान में खुफिया जानकारी और लक्ष्यों की पहचान करने में मदद कर रहा है।
दूसरी ओर, हूती प्रवक्ता यहिया सारी ने दावा किया है कि उन्होंने अल-जौफ प्रांत में सरकारी सेना की बढ़त को रोकने में सफलता पाई है। हालांकि, इस युद्ध का मानवीय पहलू बेहद चिंताजनक है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हालिया तनाव के कारण लगभग 1,000 लोगों की जान जा चुकी है और 2 लाख से ज्यादा नागरिक बेघर हो गए हैं।