ताइज़ में यमनी सेना और हुथी विद्रोहियों के बीच भीषण युद्ध, सऊदी अरब पर मिसाइल हमले

यमन के ताइज़ गवर्नर क्षेत्र में सरकारी सेना और हुथी विद्रोहियों के बीच एक बार फिर खूनी संघर्ष छिड़ गया है। 8 अक्टूबर 2026 को अल-अकरुद, जबल हबशी और अल-बायरिन के मोर्चों पर दोनों पक्षों के बीच जबरदस्त झड़पें हुईं। यह हिंसा 'डॉन ऑफ यमन' सैन्य अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हुथी विद्रोहियों के कब्जे वाले सभी इलाकों को वापस पाना है। यमन के राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि हुथी विद्रोहियों से सभी क्षेत्र मुक्त नहीं हो जाते।
चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल सगीर बिन अजीज ने पुष्टि की है कि सेना का लक्ष्य सना शहर पर दोबारा नियंत्रण पाना है। यमनी सेना के मुताबिक, इस ऑपरेशन के तहत अब तक 2,103 लक्षित हमले किए गए हैं, जिनमें 1,860 हुथी लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है।
सऊदी हवाई अड्डों पर हमले और जवाबी कार्रवाई
मैदान-ए-जंग के साथ-साथ हवा में भी तनाव बढ़ गया है। हुथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सारे ने दावा किया है कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। सारे का आरोप है कि रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है और हवाई यातायात बाधित हुआ है। सऊदी सिविल डिफेंस ने पुष्टि की है कि एक इंटरसेप्ट की गई मिसाइल के मलबे से एक बच्चों की नर्सरी और एक मेडिकल क्लिनिक को नुकसान पहुंचा है।
जवाब में, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल मल्की ने एक व्यापक ऑपरेशन चलाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गठबंधन ने यमन के विभिन्न प्रांतों में हुथी विद्रोहियों के 82 सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है, जिनमें 11 बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज साइट्स शामिल हैं। इसके अलावा, रियाद और खमीस मुशैत की ओर आने वाली तीन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
इस भीषण युद्ध का सबसे बुरा असर आम जनता पर पड़ रहा है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के अनुसार, पिछले आठ दिनों में ही 28,000 से अधिक यमनी नागरिक विस्थापित हुए हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने हिंसा के बढ़ते स्तर पर गहरी चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।