Yemen Crisis: यमन के पश्चिमी तट पर भीषण संघर्ष, ईरानी समर्थित हूती हमलों में भारी नुकसान.

यमन सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि देश के पश्चिमी तट पर पिछले कुछ दिनों के दौरान उनकी सेना को बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला ईरान समर्थित Houthi विद्रोहियों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किया गया था, जिसमें कई ईरानी हथियारों और संसाधनों का खुला इस्तेमाल किया गया। इस ताजा हिंसा और सैन्य तनाव ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है और पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है।
हिंसा का बढ़ता दायरा और रणनीतिक बंदरगाह पर कब्जा
पश्चिमी तट पर यह खूनी संघर्ष ऐसे समय में तेज हुआ है जब 5 September 2026 से यमन के कई अलग-अलग हिस्सों में भयंकर लड़ाइयां चल रही हैं। लगातार और लंबी झड़पों के बाद 10 September 2026 को हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर Mokha पर अपना कब्जा जमा लिया। यह संघर्ष सरकारी समर्थक ताकतों के साथ हुआ, जिसमें नेशनल रेजिस्टेंस, जाइंट्स ब्रिगेड, नेशंस शील्ड फोर्स और ताएज की स्थानीय इकाइयां शामिल थीं। प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के उपाध्यक्ष Tareq Saleh ने सरकारी नुकसान की बात स्वीकार की और सैन्य गतिविधियों को फिर से व्यवस्थित करने के लिए एक वैकल्पिक कमान केंद्र बनाने की घोषणा की।
मानवीय संकट और सऊदी नीत गठबंधन की जवाबी कार्रवाई
इन हालिया हमलों और गोलाबारी से सैन्य मोर्चे के साथ-साथ आम इंसानों की जिंदगी पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, 5 September के बाद से ताएज और होदेइदाह इलाकों में लगभग 18,500 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। पिछले दो हफ्तों के दौरान ताएज, पश्चिमी तट, अल-जोफ, मारिब और धलेह में हुई हिंसा में कम से कम 194 लोग मारे गए और 880 लोग घायल हो गए। हूती विद्रोहियों के इन बढ़ते कदमों को रोकने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। क्षेत्रीय समुद्री रास्तों और जहाजों को खतरा पहुंचाने वाली जगहों को निशाना बनाते हुए ताएज और होदेइदाह प्रांतों में 50 से ज्यादा हवाई हमले किए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य की चेतावनी
इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। 8 September को यमन में स्थित अमेरिकी दूतावास ने हूती आक्रमण की कड़ी निंदा की और यमन सरकार के अपने देश की रक्षा करने के कानूनी अधिकार का समर्थन किया। दूसरी तरफ, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस Faisal bin Farhan ने चेतावनी दी कि हूती विद्रोहियों ने क्षेत्र में एक गंभीर और खतरनाक संकट पैदा कर दिया है। इसके अलावा, गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल Turki al-Maliki ने सऊदी अरब के खिलाफ लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को एक बहुत बड़ा उकसावा बताया। वहीं दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने यह कसम खाई है कि गठबंधन के हवाई हमलों का बदला लेने के लिए उनकी ये सैन्य कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेंगी।