यमन में गहराया भयंकर स्वास्थ्य संकट, कोलेजेरा और कुपोषण से जूझ रहे 2 करोड़ लोग.

संयुक्त राष्ट्र ने जिनेवा से एक बड़ी और गंभीर चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि यमन के लोगों पर एक साथ कई गंभीर स्वास्थ्य संकट आ पड़े हैं। जिनेवा में दी गई जानकारी के अनुसार, देश के अंदर हैजा, खसरा, डेंगू, डिप्थीरिया और कुपोषण जैसी खतरनाक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, जिससे वहां की पहले से ही कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमराने की कगार पर पहुंच गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडहानॉम घेब्रेयेसस ने इस बात की जानकारी दी है कि मौजूदा समय में लगभग 2 करोड़ लोगों को तुरंत स्वास्थ्य सहायता की सख्त जरूरत है। इस बारे में अधिक जानकारी आप विश्व स्वास्थ्य संगठन की आधिकारिक रिपोर्ट में देख सकते हैं।
हिंसा में बढ़ोतरी और बड़े पैमाने पर विस्थापन
हाल ही में देश के भीतर लड़ाई और हिंसा काफी ज्यादा बढ़ गई है, जिससे आम जनता का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने यानी 3 सितंबर 2026 के बाद से अब तक 104,000 से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर भागने को मजबूर हो चुके हैं, जिनमें 57,000 से ज्यादा छोटे बच्चे शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने बताया है कि यह विस्थापन मुख्य रूप से अदन, हुदायदाह, अब्यान और ताइज जैसे इलाकों में हुआ है, क्योंकि वहां सऊदी समर्थित सरकार की सेना और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच भीषण झड़पें लगातार जारी हैं। इस संघर्ष से जुड़ी पूरी स्थिति की जानकारी रिलीफवेब की स्थिति रिपोर्ट में दी गई है।
इस आपसी लड़ाई और हिंसा की वजह से अब तक कम से कम 9 बच्चों की मौत हो चुकी है, 12 बच्चे बुरी तरह घायल हुए हैं और 3 बच्चे अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हिंसा और असुरक्षा के माहौल के कारण कुल 243 स्कूलों को बंद करना पड़ गया है, जिससे 137,000 से ज्यादा विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में ही रुक गई है। इसके अलावा, यूनिसेफ द्वारा चलाए जा रहे 26 स्वास्थ्य केंद्रों के कामकाज भी पूरी तरह से ठप हो गए हैं, जिससे जरूरतमंदों तक दवाइयां और इलाज नहीं पहुंच पा रहा है। इस बारे में शुरुआती आंकड़े यूनिसेफ की पहली आपातकालीन रिपोर्ट में साझा किए गए थे।
मानवीय सहायता पहुंचाने में आ रही भारी मुश्किलें
राहत और बचाव कार्य करने वाली संस्थाओं के सामने काम करना बेहद कठिन हो गया है। संयुक्त राष्ट्र सूचना सेवा की निदेशक एलेस्सांद्र्रा वेल्लुची ने बताया है कि हूती नियंत्रित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना अब नामुमकिन सा हो गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अभी भी संयुक्त राष्ट्र के 73 कर्मचारियों को वहां के स्थानीय लोगों द्वारा जबरन हिरासत में रखा गया है। यमन में कुल 5,000 स्वास्थ्य इकाइयों में से इस समय केवल 60 इकाइयां ही पूरी तरह से काम कर पा रही हैं, जिसके कारण हालात और ज्यादा बिगड़ते जा रहे हैं। मानवीय सहायता एजेंसियों ने साल 2026 के यमन ह्यूमैनिटेरियन रिस्पांस प्लान के तहत आने वाली कमियों को पूरा करने के लिए तुरंत अंतरराष्ट्रीय फंडिंग की अपील की है ताकि समय रहते लोगों की जान बचाई जा सके।