यमन में गहराया बड़ा स्वास्थ्य संकट, हिंसा और कुपोषण से बदतर हुए हालात.

Praggya Singh sabal18 September 20263 min read31 viewsYemen
यमन में गहराया बड़ा स्वास्थ्य संकट, हिंसा और कुपोषण से बदतर हुए हालात.

यमन में चल रही भारी हिंसा और लड़ाई के कारण देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद होने की कगार पर पहुँच चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने 18 सितंबर 2026 को इस खतरनाक स्थिति को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। सऊदी समर्थित सरकार और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच चल रही हिंसक झड़पों के कारण पिछले कुछ महीनों में लाखों बेकसूर लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। आम जनता इस भीषण संकट के बीच जीने को मजबूर है और सहायता एजेंसियों के लिए हालात संभालना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाएँ ठप और बीमारियों का प्रकोप

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडहानॉम गेब्रेयेसस ने 17 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि संघर्ष और पैसों की भारी कमी के कारण देश की बची-खुची स्वास्थ्य सेवाएँ भी बंद होने की कगार पर हैं। डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जसारविक के अनुसार, इस ताजा तनाव से पहले भी यमन के 5,000 स्वास्थ्य केंद्रों में से केवल 60 केंद्र ही पूरी तरह से काम कर रहे थे। इसके अलावा यूनिसेफ द्वारा चलाए जा रहे 26 स्वास्थ्य केंद्र भी बंद हो चुके हैं या उनकी सेवाएं बाधित हुई हैं। देश के नागरिकों के सामने एक साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है, जिसमें मुख्य रूप से कॉलरा, खसरा, डेंगू, डिप्थीरिया, चोटें और बड़े पैमाने पर फैला कुपोषण शामिल है। देश में कुल 19.3 मिलियन लोगों को स्वास्थ्य मदद की जरूरत है, लेकिन फंड की कमी के कारण केवल 7.3 मिलियन लोगों तक ही मदद पहुँच पा रही है। स्वास्थ्य क्लस्टर की साल 2026 की कुल जरूरतों का केवल 18 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो पाया है।

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विस्थापन और मानवीय सहायता में बाधाएं

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 से लेकर अब तक लगभग 112,818 लोग अपने घरों से बेघर हो चुके हैं, जिनमें से अकेले पिछले दो हफ्तों में पश्चिमी तट के अदन, हुदैदाह, अब्यान और ताइज जैसे इलाकों से 112,000 से अधिक नए लोग विस्थापित हुए हैं। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र सूचना सेवा की निदेशक एलेस्andra वेलुची ने बताया कि हूती नियंत्रित इलाकों में काम करना नामुमकिन हो गया है क्योंकि वहां कर्मचारियों को हिरासत में लिया जा रहा है और संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों पर कब्जा किया जा रहा है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए ReliefWeb रिपोर्ट और WHO की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट किया जा सकता है। हिंसा की वजह से शिक्षा का क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहाँ 243 स्कूल बंद हो चुके हैं और इससे 137,000 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं।

बच्चों पर भारी पड़ रहा है संघर्ष

यूनिसेफ के क्षेत्रीय निदेशक एडौरार्ड बेइगबेडर ने बताया कि गत 3 सितंबर से अब तक कम से कम 9 बच्चों की मौत हो चुकी है, 12 बच्चे घायल हुए हैं और 3 बच्चे अभी भी लापता हैं। इसके अलावा पिछले दो हफ्तों में 57,000 से ज्यादा बच्चे बेघर हो चुके हैं। हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को पार करके नावों के जरिए जिबूती भाग रहे हैं, जहां जिबूती सरकार 10,000 तक शरणार्थियों के आने की तैयारी कर रही है। यमन में आईओएम के मिशन प्रमुख अब्दुसत्तोरो एसोएव ने चेतावनी दी है कि मानवीय संसाधन बहुत कम हैं और वे जल्द ही खत्म होने वाले हैं, जबकि देश भर में 18.3 मिलियन लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं।

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