यमन में मंडरा रहा है बड़ा स्वास्थ्य संकट, स्वास्थ्य मंत्री ने दी चेतावनी और कहा की स्थिति बेहद खतरनाक है।

Praggya Singh sabal27 September 20263 min read2 viewsYemen
यमन में मंडरा रहा है बड़ा स्वास्थ्य संकट, स्वास्थ्य मंत्री ने दी चेतावनी और कहा की स्थिति बेहद खतरनाक है।

यमन में जारी भीषण युद्ध के बीच देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और हालात इतने खराब हो गए हैं कि कभी भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। 27 सितंबर 2026 को यमन के सार्वजनिक स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्री Qasim Buhaibeh ने एक इंटरव्यू के दौरान गंभीर चेतावनी दी है कि देश का स्वास्थ्य सिस्टम बर्बाद होने के कगार पर पहुंच चुका है। लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष ने देश के सभी जरूरी संसाधनों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे आम जनता को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिलना भी मुश्किल हो गया है।

यमन में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल और फंड की कमी

मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक लगभग 19.3 मिलियन यमनी नागरिकों को स्वास्थ्य सहायता की सख्त जरूरत है, लेकिन इसके मुकाबले केवल 17 प्रतिशत फंड ही मिल पाया है। स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि देश के स्वास्थ्य केंद्र जो अपनी पूरी क्षमता से काम करते थे, उनकी संख्या अब घटकर 50 प्रतिशत से भी कम रह गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के पिछले आंकड़ों में यह संख्या 60 प्रतिशत थी, जिसमें अब भारी गिरावट दर्ज की गई है। ईंधन, जरूरी दवाइयों और मेडिकल सप्लाई की भारी कमी के कारण देश भर के कई बड़े अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह से बंद हो चुके हैं।

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आपसी संघर्ष और संसाधनों की कमी के चलते देश में आपातकालीन सेवाएं, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण अभियान, पोषण सेवाएं, डायलिसिस और कैंसर का इलाज सबसे ज्यादा खतरे में आ गया है। इसके अलावा, हुथी नियंत्रित क्षेत्रों से स्वास्थ्य डेटा की रिपोर्टिंग भी पिछले लगभग एक साल से पूरी तरह से रुकी हुई है, जिससे स्थिति का सही अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की गुहार और यूके का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में यमन की विदेश मंत्री Afrah Al-Zouba ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के सामने खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को दोबारा पटरी पर लाने के लिए तुरंत मदद की गुहार लगाई। विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि स्वास्थ्य मंत्रालय 2026 से 2030 के लिए एक नई राष्ट्रीय रणनीति तैयार कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने हुथी ताकतों पर यह गंभीर आरोप भी लगाया कि वे कोरोना या अन्य बीमारियों के टीके की डिलीवरी में रुकावट डाल रहे हैं और मेडिकल स्टाफ को जबरन हिरासत में ले रहे हैं। विदेश मंत्री की इस अपील के बाद यूनाइटेड किंगडम यानी UK ने आपातकालीन सहायता के रूप में 10 मिलियन पाउंड देने की घोषणा की है।

जमीनी हकीकत और विस्थापन का संकट

जमीनी स्तर पर हालात कितने खतरनाक हैं, इसकी जानकारी ताएज प्रांत के स्वास्थ्य कार्यालय के प्रबंधक Fahd al-Nazari ने दी। उन्होंने बताया कि स्थिति बेहद खतरनाक है क्योंकि कुछ अस्पताल पहले ही बंद हो चुके हैं और बाकी बचे अस्पताल भी कभी भी बंद होने की कगार पर हैं। इस मानवीय संकट को और बढ़ाने का काम लोगों के भारी पैमाने पर विस्थापन ने किया है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन यानी IOM की रिपोर्ट के मुताबिक, जून से 22 सितंबर 2026 के बीच कुल 134,550 लोग अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर हुए हैं, जिनमें मुख्य रूप से ताएज, लाहिज और अदेन के इलाके शामिल हैं।

इन खराब हालातों के कारण देश में हैजा, खसरा और पोलियो जैसी खतरनाक बीमारियों के फैलने की खबरें लगातार आ रही हैं। स्थिति यह है कि पांच साल से कम उम्र के लगभग आधे बच्चे गंभीर और पुरानी कुपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, हुथी संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 27 सितंबर को ताएज के एक बाजार में हुए हमले में 7 लोगों की मौत हो गई और 40 लोग घायल हो गए। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने पुष्टि की कि उनके सुरक्षा बलों ने पास ही स्थित एक हुथी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप Al Jazeera की रिपोर्ट देख सकते हैं।

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