यमन में बड़ा संकट, मोचा शहर पर हौथी बलों का कब्जा, स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ठप.

यमन के लाल सागर के तट पर हालात बहुत खराब हो गए हैं और वहां स्वास्थ्य सेवाओं में भारी कमी आ गई है। Doctors Without Borders (MSF) ने चेतावनी दी है कि हौथी बलों के तेजी से आगे बढ़ने के बाद मोचा और पश्चिमी तट पर चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। यमन में MSF के देश समन्वयक Lou Cormack ने 11 सितंबर 2026 को बताया कि इस सैन्य हमले का असर सीधे तौर पर मेडिकल सेवाओं पर पड़ा है। लड़ाई शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर अस्पतालों को खाली कराना पड़ा और मेडिकल स्टाफ तथा हजारों स्थानीय लोग मोचा छोड़कर अदन की तरफ भाग गए।
मोचा शहर पर कब्जा और अस्पतालों से मेडिकल उपकरण हटाने की खबर
तारीख 13 सितंबर 2026 तक हौथी बलों ने मोचा के मुख्य बंदरगाह शहर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। इसके बाद धूबब और पेरिम इलाकों पर भी उनका नियंत्रण हो गया। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मोचा के December 2nd Hospital और अल-खौखा के Sheikh Mohamed bin Zayed Hospital से जीवन रक्षक उपकरण, सीटी स्कैनर और अन्य मेडिकल सामान हटा लिए गए। बताया गया कि इन सभी उपकरणों को सना ले जाया जा रहा है। हालांकि MSF अभी भी मोचा के जनरल अस्पताल में सिर्फ करीब 30 कर्मचारियों के साथ सीमित रूप से काम कर रहा है, लेकिन संगठन ने साफ किया है कि अब मोचा के अंदर या अदन के लिए मरीजों को रेफर करना संभव नहीं बचा है।
कुपोषण के मामलों में भारी बढ़ोतरी और विस्थापन का संकट
इस ताजा संघर्ष से पहले ही जनवरी से जून 2026 के दौरान MSF ने मोचा, माफ्रक और खौखा के अपने केंद्रों में गंभीर कुपोषण से पीड़ित 4,909 बच्चों का इलाज किया था। अब युद्ध छिड़ने की वजह से यह स्वास्थ्य संकट और भी ज्यादा गंभीर हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत Hans Grundberg ने 12 और 13 सितंबर को चेतावनी दी कि देश युद्ध के एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है और एक बार फिर पूर्ण पैमाने पर संघर्ष शुरू हो गया है। जंग की वजह से अपने घर-बार छोड़कर भागने वाले लोगों की संख्या में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है।
विस्थापितों की संख्या में भारी उछाल और अंतरराष्ट्रीय मदद
अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने 12 सितंबर को शुरुआती रिपोर्ट में बताया था कि ताएज़ और होदेइदाह में 46,000 लोग विस्थापित हुए हैं। इसके बाद 13 सितंबर तक यह अनुमानित आंकड़ा बढ़कर 76,000 तक पहुंच गया। राहत कार्यों से जुड़े लोगों ने बताया कि फ्रंटलाइन पर चल रही भयंकर लड़ाई के कारण कई पूरे के पूरे गांव खाली हो गए हैं और वहां रहने वाले परिवारों के पास खाने-पीने का सामान भी खत्म हो रहा है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए यमन की सरकार ने 13 सितंबर को विस्थापन को संभालने के वास्ते कुछ जरूरी उपायों को मंजूरी दी। इसके अलावा रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थन और 100 से अधिक अमेरिकी सैन्य सलाहकारों की खुफिया मदद से यमन की सेना ने हवाई जवाबी हमला शुरू कर दिया है।