यमन में हूती विद्रोहियों का कहर जारी, यूएन और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को बनाया जा रहा है निशाना.

यमन में मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जहां हूती नियंत्रण वाले इलाकों में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और सहायता कर्मियों को लगातार हिरासत में रखा जा रहा है। 26 अगस्त 2026 तक की स्थिति के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन हूती हिरासत में बंद मानवीय सहायता कर्मियों की तुरंत रिहाई की मांग कर रहे हैं। यह पूरा मामला 31 मई 2024 को शुरू हुए एक बड़े हिरासत अभियान से जुड़ा हुआ है। फरवरी 2026 तक के रिकॉर्ड बताते हैं कि 73 यूएन स्टाफ मेंबर और दर्जनों अन्य यमन के मानवीय कार्यकर्ता इस कैद में हैं। इन लोगों को अक्सर बिना किसी वारंट के पकड़ा जाता है, इन्हें गायब कर दिया जाता है और इन्हें कानूनी सलाह या जरूरी मेडिकल सुविधा तक नहीं दी जाती है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ReliefWeb Report पर जा सकते हैं।
अधिकारियों पर जुल्म और जबरन बयान लेने की कोशिश
हाल ही में 23 अगस्त 2026 को हूती अधिकारियों ने कम से कम छह कैदियों को सना में विशेष आपराधिक अभियोजन के पास ट्रांसफर कर दिया। इस ग्रुप में एक संयुक्त राष्ट्र का कर्मचारी, एक यूएन कंसलटेंट और अंतरराष्ट्रीय तथा स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े तीन लोग शामिल हैं। इनमें डॉ. अली अल-मुधवाही भी शामिल हैं, जो यूनिसेफ के कंसलटेंट और हूती नियंत्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय के सलाहकार हैं। उनकी पत्नी के अनुसार, डॉ. अल-मुधवाही को अकेले कालकोठरी में रखा गया है, उन्हें टॉर्चर किया गया है और भारी मानसिक दबाव दिया गया है। पकड़ने वाले लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ उनके काम को लेकर उनसे झूठे कबूलनामे करवाने की कोशिश कर रहे हैं।
यमन के कानूनों की खुलेआम धज्जियां
हूती प्रशासन के ये कदम यमन के आपराधिक प्रक्रिया कानून का सीधा उल्लंघन करते हैं। इस कानून के तहत किसी भी कैदी को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक अभियोजन के सामने पेश करना जरूरी होता है। इस हिरासत की स्थिति के दौरान कई लोगों की जान भी जा चुकी है, जिसमें 11 फरवरी 2025 को हिरासत में ही विश्व खाद्य कार्यक्रम के एक सहायता कर्मी की मौत का मामला भी शामिल है। यमन के यूएन में स्थायी प्रतिनिधि अब्दुल्ला अल-सादी ने 13 अगस्त 2026 को सुरक्षा परिषद को जानकारी दी थी कि हूती अधिकारियों ने 1,600 कैदियों को रिहा करने के एक यूएन-समर्थित समझौते को ठुकरा दिया है। उन्होंने इस समूह पर इंसानी जिंदगियों को सौदेबाजी का जरिया बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस बारे में और अधिक विवरण आप UK Government Speech पर पढ़ सकते हैं।
मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख और मानवीय मामलों के अवर महासचिव टॉम फ्लेचर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में यमन के बिगड़ते मानवीय हालात पर गहरी चिंता जताई है। अधिकारी लगातार दुनिया भर के देशों से अपील कर रहे हैं कि वे हूती नेतृत्व पर कड़ा दबाव बनाएं। मकसद यह है कि सभी गैरकानूनी तरीके से रोके गए कर्मियों को तुरंत आजाद कराया जाए और वहां मानवीय सहायता की सुरक्षित आवाजाही को दोबारा से बहाल किया जा सके।