Yemen Crisis: हूती विद्रोहियों के हमलों से बदला पावर बैलेंस, विश्लेषक एलिजाबेथ केंडल ने किया बड़ा दावा.

यमन में चल रहे संघर्ष और क्षेत्रीय राजनीति को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। जानी-मानी विश्लेषक Elisabeth Kendall ने हाल ही में बयान दिया है कि यमन के Houthi विद्रोहियों की तरफ से किए जा रहे हमलों और कब्जों ने वहां की पूरी ताकत का संतुलन बदल दिया है। इस बदलाव की वजह से विद्रोही गुट को क्षेत्रीय राजनीति में बहुत ज्यादा ताकत और बढ़ावा मिल रहा है। यह पूरी स्थिति 23 सितंबर 2026 तक के हालातों को ध्यान में रखते हुए सामने आई है, जहां लगातार राजनीतिक और सैन्य मोर्चे पर बड़ा फेरबदल देखा जा रहा है।
तेल और गैस संसाधनों पर कब्जे की जंग
हूती विद्रोहियों को Ansar Allah के नाम से भी जाना जाता है। यह गुट लगातार यमन के तेल और गैस संसाधनों पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करने की कोशिश में लगा हुआ है। 21 सितंबर को हूती सुप्रीम लीडर Abdulmalik al-Houthi ने सऊदी अरब के सामने एक बड़ी मांग रखी। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब यमन को उसकी प्राकृतिक संपत्ति से वंचित करना बंद करे। उनका यह भी कहना था कि यमन का असली और एकमात्र वैध प्रतिनिधि उनका अपना नेतृत्व ही है। इस तरह के बयानों के बाद से जमीन पर कब्जे की लड़ाई और ज्यादा तेज हो गई है।
रणनीतिक इलाकों पर कब्जा और समुद्री रास्ते का खतरा
विद्रोही गुट ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक जगहों पर कब्जा जमा लिया है। इसमें बंदरगाह शहर Mokha और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य का एक द्वीप शामिल है, जो दुनिया भर के जहाजों के आने-जाने के लिए एक बहुत अहम समुद्री रास्ता है। इसके अलावा, यह गुट अब Taiz और Lahij प्रांतों के पहाड़ी इलाकों की तरफ भी लगातार आगे बढ़ रहा है। इन सैन्य गतिविधियों की वजह से पूरे इलाके में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं।
सऊदी अरब पर हमले और सरकारी सेना की जवाबी कार्रवाई
सैन्य तनाव उस समय और बढ़ गया जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी रियाद पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करने का दावा किया। हालांकि, सऊदी सुरक्षा बलों ने समय रहते इन हमलों को हवा में ही रोक दिया और मिसाइलों को नष्ट करने का दावा किया। दूसरी तरफ, यमन की सरकारी सेना ने स्थानीय लोगों और प्रतिरोध सेनानियों के साथ मिलकर दक्षिणी Taiz में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Mount Qarfan पर दोबारा कब्जा कर लिया है। इस सफलता से सरकारी सेना को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन ज़मीनी हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और संयुक्त राष्ट्र की बैठक
समुद्री जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा पर मंडराते खतरे को देखते हुए United Nations Security Council ने आपातकालीन बैठकें बुलाई हैं। इसके अलावा, जी-7 (G7) देशों के विदेश मंत्रियों ने आधिकारिक तौर पर ईरान से मांग की है कि वह हूती विद्रोहियों को हथियार देना तुरंत बंद करे। साथ ही, सभी हूती सैन्य कार्रवाइयों और नागरिक जहाजों को दी जा रही धमकियों को फौरन रोकने के लिए कहा गया है।
विश्लेषक Elisabeth Kendall का यह भी कहना है कि पारंपरिक सैन्य ताकत के जरिए इस समूह को रोकना बहुत मुश्किल साबित हो रहा है। इसकी मुख्य वजह उनके पास मौजूद आधुनिक मिसाइल तकनीक और उनकी मजबूत वैचारिक सोच है, जिसकी वजह से भविष्य में किसी भी तरह के सत्ता-बंटवारे के समझौते पर बात करना बेहद पेचीदा हो गया है। इन तमाम घटनाओं से खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ रहा है।