Yemen Crisis: हूती विद्रोहियों ने मयून द्वीप और अमेरिकी सैन्य उपकरणों पर किया कब्जा, संघर्ष तेज.

Nura Basta13 September 20263 min read31 viewsYemen
Yemen Crisis: हूती विद्रोहियों ने मयून द्वीप और अमेरिकी सैन्य उपकरणों पर किया कब्जा, संघर्ष तेज.

यमन में चल रहे संघर्ष ने एक बार फिर से बड़ा मोड़ ले लिया है जहां हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मयून द्वीप (जिसे पेरिम द्वीप भी कहा जाता है) पर शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को अपना कब्जा जमा लिया है। इस घटनाक्रम को बाब अल-मदब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण पाने की उनकी कोशिशों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह क्षेत्र व्यापार और जहाज़ों की आवाजाही के लिए बहुत अहम है, और इस पर नियंत्रण होने से हालात काफी बदल सकते हैं। इससे पहले गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को सऊदी समर्थित सरकारी बलों के पीछे हटने के बाद मोखा बंदरगाह शहर पर भी विद्रोहियों का कब्जा हो गया था। इन दोनों जगहों के हाथ लगने से हूती पहली बार संघर्ष शुरू होने के बाद से पूरे यमन के लाल सागर तटीय इलाके पर पकड़ बना चुके हैं।

अमेरिकी सैन्य उपकरणों पर कब्जा और सैन्य साजो-सामान

मोखा के पतन के तुरंत बाद, पीछे हट रहे सरकारी बलों द्वारा छोड़े गए करोड़ों डॉलर के अमेरिकी सैन्य उपकरणों को हूतियों ने अपने कब्जे में ले लिया। इस जब्त किए गए सामान में ओश्कोश एम-एटीवी माइन-प्रतिरोधी वाहन, कई बख्तरबंद गाड़ियां, भारी हथियारों से लैस पिकअप ट्रक, तोपखाने और भारी मात्रा में गोला-बारूद तथा छोटे हथियार शामिल हैं। सामने आए वीडियो फुटेज में हूती लड़ाके इन उपकरणों की जांच करते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं, जिसमें अमेरिकी कंपनी ओश्कोश और सऊदी अरब के अल तदरा मैन्युफैक्चरिंग के संयुक्त उद्यम से जुड़ा एक बख्तरबंद ट्रक भी शामिल है। यह सारा सामान मूल रूप से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा सहयोगी बलों को दिया गया था ताकि वे अपनी सुरक्षा कर सकें लेकिन अब यह विरोधी गुट के हाथ लग गया है।

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हूती नेताओं और सऊदी अरब की प्रतिक्रिया

शुक्रवार को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरेआ ने एक बयान में कहा कि सभी कंपनियों के लिए समुद्री नौवहन सुरक्षित बना हुआ है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से इसमें सऊदी जहाजों को शामिल नहीं किया है। इसके अलावा, हूती कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद अहमद मिफ्ताह ने 12 सितंबर को सना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन सैन्य अभियानों के बारे में विस्तार से बात की। दूसरी तरफ, यमन की राष्ट्रीय रक्षा परिषद ने इन सभी आगे के कदमों की कड़ी निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगाई है। जवाब में सऊदी अरब ने मोखा हवाई अड्डे पर हवाई हमले किए और शुक्रवार को ड्रोन हमले की आशंका के चलते एक मुख्य तेल पाइपलाइन को भी सावधानी के तौर पर बंद कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और अमेरिका का रुख

इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की भी कड़ी नजर बनी हुई है। हालांकि वहां 100 से अधिक अमेरिकी सैन्य सलाहकार खुफिया जानकारी और निशाना लगाने में मदद कर रहे थे, इसके बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया कि अमेरिका ने सऊदी अरब की तरफ से सीधी सैन्य दखਲ देने की मांग को ठुकरा दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि हूतियों ने खुद अमेरिका से संपर्क करके यह अनुरोध किया था कि अमेरिका इस मामले में सीधा दखल न दे। उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने हूतियों की इन सफलताओं का खुले तौर पर स्वागत किया है और सऊदी के नेतृत्व वाले नाकाबंदी को तुरंत खत्म करने की मांग रखी है। संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने चेतावनी दी है कि इस नए सिरे से भड़की लड़ाई ने पिछले चार साल से चली आ रही शांति और स्थिरता के दौर को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इस दौरान मोखा में संयुक्त राष्ट्र का एक परिसर भी हूतियों के कब्जे में चला गया, हालांकि गनीमत यह रही कि सभी संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी वहां से सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए थे।

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