Yemen Conflict: हूती बलों ने मोखा बंदरगाह पर किया कब्जा, सऊदी अरब पर फिर से हुए मिसाइल और ड्रोन हमले.

Praggya Singh sabal10 September 20263 min read48 viewsYemen
Yemen Conflict: हूती बलों ने मोखा बंदरगाह पर किया कब्जा, सऊदी अरब पर फिर से हुए मिसाइल और ड्रोन हमले.

यमन में चल रहा पुराना संघर्ष फिर से भयानक रूप ले चुका है, जहां हूती बलों ने एक बड़े सैन्य अभियान के तहत रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। इस नए हमले के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है क्योंकि इस कब्जे से हूती समूह को बाब अल-मैंडब जलडमरूमध्य के पास पश्चिमी तट पर सीधा नियंत्रण मिल गया है। इस ताजा तनाव के बीच सऊदी अरब को निशाना बनाकर लगातार सीमा पार से मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

हूती और सऊदी अरब के बीच हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई तेज

क्षेत्रीय तनाव के इस नए दौर में दोनों तरफ से लगातार सैन्य कार्रवाई की जा रही है। हूती अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि उनके ठिकानों को निशाना बनाकर लगभग 40 सऊदी हवाई हमले किए गए हैं। इन हमलों का जवाब देने और अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए यमन की सरकार ने सना'आ को फिर से अपने कब्जे में लेने के लिए एक बड़े जवाबी सैन्य अभियान की शुरुआत की है। प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के उपाध्यक्ष طارق صالح (Tareq Saleh) ने हाल ही में मोखा के दक्षिण में एक नए कमांड सेंटर की स्थापना की पुष्टि की है, ताकि हालिया लड़ाई में हुए सैनिकों के नुकसान के बाद सेना को फिर से संगठित किया जा सके। इस भयंकर संघर्ष में अब तक दोनों पक्षों की ओर से 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

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अंतरराष्ट्रीय और आधिकारिक प्रतिक्रियाएं

बढ़ते संघर्ष के बीच सऊदी विदेश मंत्री राजकुमार फैसल बिन फरहान ने साफ शब्दों में कहा कि किंगडम अपनी रक्षा करने के अधिकार को सुरक्षित रखता है, भले ही वह कूटनीतिक बातचीत के रास्तों को खुला रखने का प्रयास कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय यानी FCDO ने एक आधिकारिक बयान जारी कर हूती विद्रोहियों द्वारा संघर्ष को फिर से शुरू करने और सऊदी अरब की जमीन पर हमलों की कड़ी निंदा की है। ब्रिटिश सरकार ने इस पूरे संकट के लिए सीधे तौर पर हूती नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। इस बीच, हूती समर्थित यमन के विदेश मंत्रालय ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि वे सऊदी अरब के लगातार हो रहे हवाई अभियानों के जवाब में ही अपनी रक्षात्मक कार्रवाई कर रहे हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप FCDO Statement on Yemen पर जा सकते हैं।

शांति समझौतों पर मंडराता संकट और भविष्य के कयास

विश्लेषकों का मानना है कि यमन में छिड़ी इस ताजा जंग ने साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के समझौतों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अब 'मक्का समझौते' को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जिसके तहत यदि सऊदी अरब आपातकाल की स्थिति घोषित करता है, तो तुर्की या पाकिस्तानी सेनाओं को हस्तक्षेप करने की अनुमति मिल सकती है। अल जज़ीरा के लिए लिखने वाले खालिद एम. बतार्फी ने अपने लेख में इस बात पर जोर दिया कि न तो सऊदी अरब और न ही यमन को किसी लंबी लड़ाई की आवश्यकता है, लेकिन इस बड़ी तबाही से बचने का एकमात्र रास्ता सैन्य ताकत और राजनीतिक समझौते के बीच सही संतुलन बनाना ही है। इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट आप ReliefWeb Yemen Report पर देख सकते हैं।

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