Yemen Crisis: यमन में हूती विद्रोहियों के हमलों से मचा हड़कंप, 1.5 लाख से अधिक लोग हुए बेघर.

यमन में चल रहे भीषण संघर्ष के बीच आम नागरिकों के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती विद्रोहियों की तरफ से लगातार किए जा रहे भारी हमलों और गोलाबारी की वजह से देश भर में 150,000 से अधिक लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है। यह जानकारी सामने आने के बाद इलाके में मानवीय संकट काफी ज्यादा गहरा गया है और आम जनता सुरक्षित ठिकानों की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हो गई है। इस गंभीर स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार एजेंसियों की चिंता को भी बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन की रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) की तरफ से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केवल 30 अगस्त से 5 सितंबर 2026 के छोटे से अंतराल के दौरान ही करीब 13,500 लोग यानी 2,250 परिवार विस्थापित होने को मजबूर हुए थे। लोगों के पलायन की यह मुख्य घटनाएं मुख्य तौर पर ताइज़, होदेइदाह और लाहज गवर्नरट्स में देखने को मिलीं। अकेले ताइज़ के मकबनाह जिले में ही 729 विस्थापित परिवार दर्ज किए गए। इसके अलावा, 7 सितंबर 2026 को होदेइदाह के गवर्नर डॉ. अल-हassan ताहिर ने खुद इस बात की पुष्टि की थी कि उनके इलाके में लगातार जारी झड़पों की वजह से 790 से ज्यादा परिवारों को अपना घर खाली करना पड़ा है। इस पूरी स्थिति की विस्तृत जानकारी आप ReliefWeb Report पर देख सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
इस खतरनाक हालातों को देखते हुए 8 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र के यमन में विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लड़ाई का दायरा लगातार फैल रहा है जिससे जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच रहा है और आम परिवारों की जान पर रोज खतरा मंडरा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने मानवीय संकट के लिए सीधे तौर पर हूती समूह को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने खासतौर पर इस बात पर जोर दिया कि विस्थापन शिविरों और रिहायशी इलाकों को लगातार निशाना बनाकर गोलाबारी की जा रही है जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है।
दक्षिण-पश्चिम यमन में सैन्य गतिविधियां और आमने-सामने की झड़पें लगातार बहुत तेज बनी हुई हैं। इन खूनी संघर्षों की वजह से हाल ही में सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं और जान बचाने के लिए नागरिक भागकर अल-बाइरीन कैंप जैसे इलाकों में शरण ले रहे हैं। आम नागरिकों की यह दयनीय स्थिति आने वाले दिनों में और ज्यादा भयानक रूप ले सकती है क्योंकि राहत सामग्री और सुरक्षित जगहों का पहुंचना भी अब बहुत कठिन होता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए लगातार कोशिश कर रही हैं लेकिन हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है।