यमन के हूती संगठन की खुली धमकी, अमेरिकी सेना को पनाह देने वाले देशों को चुकानी होगी बड़ी कीमत.

ईरान पर हुए अमेरिकी हमलों के बाद यमन के हूती आंदोलन ने बड़ा ऐलान किया है और ईरान का खुला समर्थन करने की बात कही है। हूती सरकार की तरफ से आए आधिकारिक बयान में यह साफ किया गया है कि अमेरिकी सेना को अपने यहां जगह देने वाले देशों को इसके बुरे नतीजे भुगतने होंगे। यह पूरा मामला 1 सितंबर 2026 का है जब अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए थे।
अमेरिका और ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने यह जानकारी दी थी कि उन्होंने 1 सितंबर 2026 को ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, समुद्री हथियार और संचार व्यवस्था को निशाना बनाया गया था। अमेरिका का कहना था कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हो रहे हमलों और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी थी। वहीं दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया। ईरान की तरफ से यह भी कहा गया कि सिरीक इलाके में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले में 5 नागरिकों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए।
कुवैत और जॉर्डन में भी दिखा असर
ईरान की तरफ से किए गए पलटवार में ड्रोन और मिसाइलें दागी गईं। इस दौरान क्षेत्रीय देशों में सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गए। जॉर्डन ने हवा में ही 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक लिया, जबकि कुवैत में भी ड्रोन हमलों से निपटने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम को चालू करना पड़ा। अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनिया के 11 देशों में अपने राजनयिक मिशनों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी कर दी है और ईरान में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है।
हूती संगठन ने अपनी चेतावनी में उन सभी सरकारों पर निशाना साधा जो अमेरिका का साथ दे रही हैं। उनका कहना है कि जो देश अमेरिका की गुलामी कर रहे हैं, उन्हें इस आक्रामकता का खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और 1737 प्रतिबंध समिति पर चर्चा की तैयारी चल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर भी जी-20 देशों के बीच बातचीत जारी है।