Yemen Houthi Threat: पाकिस्तान और तुर्की को हूती समूह की खुली चेतावनी, सऊदी अरब का साथ दिया तो होगा कड़ा हमला.

यमन के हूती समूह ने 20 सितंबर 2026 को पाकिस्तान और तुर्की को कड़ी चेतावनी जारी की है। हूती अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि इन देशों ने सऊदी अरब को किसी भी तरह की सैन्य मदद दी, तो समूह उन पर लोहे की मुट्ठी से हमला करेगा। इस बड़े बयान के बाद खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों के बीच चिंता का माहौल बन गया है, क्योंकि किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर सुरक्षा व्यवस्था और उड़ानों पर पड़ता है।
मक्का रक्षा समझौते के बाद बढ़ा तनाव
यह पूरा विवाद 7 अगस्त 2026 को साइन किए गए मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट के बाद और गहरा गया है। इस समझौते के तहत सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने सामूहिक सुरक्षा का संकल्प लिया है, जिसका मतलब है कि किसी एक पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। हूती अधिकारी मोहम्मद अल-बुखैती ने पाकिस्तान और तुर्की से अपील की कि वे इस संघर्ष में पूरी तरह तटस्थ रहें और किसी भी तरह के सैन्य हस्तक्षेप से दूर रहें।
तुर्की और पाकिस्तान का रुख
बीते 19 सितंबर 2026 को तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने पुष्टि की थी कि उनका देश सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के लिए तकनीकी सहायता देने को तैयार है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने पहले ही सऊदी सुरक्षा के प्रति अपनी बिना शर्त प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने 10 सितंबर 2026 को यह स्पष्ट किया था कि अभी तक वहां सेना भेजने का कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया है।
रियाद और यानबू में ड्रोन और मिसाइल हमले
ठीक इसी तनाव के बीच 19 सितंबर 2026 को हूती बलों ने रियाद और सऊदी अरामको की यानबू फैसिलिटी पर ड्रोन और मिसाइल से हमले करने की जिम्मेदारी ली। सऊदी प्रशासन ने राजधानी की ओर आ रही एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके अलावा ताइफ, बायश और फरसान में भी हमलों को नाकाम किया गया। इन हमलों के कारण रियाद के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उड़ानों में काफी देरी हुई, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जुलाई 2026 में हूती समूह द्वारा रियाद के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा के बाद से यह क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना जा रहा है।