यमन में बड़ा संकट, हूथी विद्रोहियों ने मोचा शहर में UN के राहत गोदाम पर किया कब्जा, 46 हजार लोग हुए बेघर.

यमन में चल रहे संघर्ष के बीच एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। संयुक्त राष्ट्र ने इस बात की पुष्टि की है कि हूथी विद्रोहियों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर मोचा में एक मानवीय सहायता सुविधा केंद्र पर कब्जा कर लिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और आम जनता की मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। युद्ध की इस विभीषिका के कारण आम लोगों का जीवन नर्क बन गया है और उन्हें अपनी जान बचाने के लिए अपना घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों की सुरक्षित निकासी
संयुक्त राष्ट्र के उप-प्रवक्ता फरहान हक ने शुक्रवार को यह जानकारी दी कि मोचा शहर में बने इस ह्यूमैनिटेरियन यानी मानवीय सहायता परिसर को हूथी लड़ाकों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। गनीमत यह रही कि इस मिलिशिया के वहां पहुंचने से पहले ही सभी संयुक्त राष्ट्र कर्मी उस परिसर से पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकल चुके थे। इस सुविधा केंद्र में विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के कर्मचारी काम करते थे और इस जगह का मुख्य उद्देश्य उस पूरे क्षेत्र में जरूरतमंद लोगों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना था। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा है कि भले ही उनके सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं, लेकिन इस तरह के मानवीय परिसरों और संपत्तियों की सुरक्षा करना बहुत ज्यादा जरूरी है।
सुरक्षा को लेकर चिंता और मानवीय पहुंच की मांग
संयुक्त राष्ट्र ने एक बार फिर से इस बात पर जोर दिया है कि संघर्ष के बीच काम कर रहे राहत कर्मियों और उनके संस्थानों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। संगठन की तरफ से यह अपील की गई है कि जरूरतमंद आबादी तक जीवन रक्षक सहायता पहुंचाने के लिए सुरक्षित और बिना किसी रोक-टोक के रास्ता मिलना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र का सुरक्षा विभाग लगातार इस स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सभी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, यमन में अलग-अलग जगहों पर हिरासत में लिए गए 73 संयुक्त राष्ट्र और गैर-सरकारी संगठनों के कर्मचारियों को तुरंत रिहा करने की पुरानी मांग को फिर से दोहराया गया है।
मोचा पर कब्जा और सऊदी अरब की एयरस्ट्राइक
यह पूरा घटनाक्रम 10 सितंबर 2026 को तब शुरू हुआ जब सऊदी समर्थित सरकारी बलों के पीछे हटने के बाद हूथी विद्रोहियों ने मोचा शहर पर अपना कब्जा जमा लिया। यमन के संघर्ष में इसे एक बहुत बड़ा मोड़ माना जा रहा है। इस सामरिक कदम से लाल सागर के तट पर हूथी नियंत्रण और ज्यादा मजबूत हो गया है, जिसके बाद उनके लड़ाके बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और पेरिड के रणनीतिक द्वीप की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस बढ़ते तनाव और खतरे को देखते हुए सऊदी अरब ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए 11 सितंबर को मोचा हवाई अड्डे को निशाना बनाकर दो हवाई हमले किए।
विस्थापन का बढ़ता आंकड़ा और आईओएम की चेतावनी
अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन यानी IOM की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने के शुरुआती दिनों से ही लड़ाई इतनी ज्यादा तेज हो गई है कि कम से कम 46,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। यह संख्या पहले के 18,500 के आंकड़े से दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। IOM की प्रमुख एमी पोप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह संघर्ष बहुत तेजी से फैल रहा है, जिसकी वजह से राहत और बचाव कार्य में भारी बाधा आ रही है। सरकारी सैनिक नए कमांड सेंटर बनाने के लिए धूबाब की तरफ पीछे हट रहे हैं, जबकि सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और बच्चे अपनी जान बचाकर लाहज और अदन की तरफ भाग रहे हैं। हूथी सैन्य प्रवक्ता याहिया सारे ने छह जिलों से सरकारी सैनिकों को खदेड़ने का दावा किया है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के यमन दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस बढ़ते संकट को रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने की अपील की है।