यमन में गहराया मानवीय संकट, दो हफ्ते में 112,000 से ज्यादा लोग हुए बेघर

Aanya18 September 20262 min read27 viewsYemen
यमन में गहराया मानवीय संकट, दो हफ्ते में 112,000 से ज्यादा लोग हुए बेघर

यमन में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र ने वहां तेजी से बढ़ते मानवीय संकट को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। पिछले दो हफ्तों के दौरान देश में तेज हुई हिंसा के कारण 112,000 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि विस्थापन के आंकड़े बढ़कर 125,000 तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। संघर्ष मुख्य रूप से पश्चिमी तट पर केंद्रित है, जहां Ta'iz, Lahj और Al Hodeidah गवर्नरेट में सबसे ज्यादा विस्थापित परिवार पहुंचे हैं.

बच्चों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी असर

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट की वजह से आम जनता को बहुत ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन यानी IOM ने चेतावनी दी है कि राहत सामग्री और संसाधन बहुत सीमित बचे हैं। इसके अलावा UNICEF ने 17 सितंबर 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि अकेले पिछले दो हफ्तों में 57,000 से ज्यादा बच्चे विस्थापित हुए हैं, जिनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जानकारी दी कि इस ताजा तनाव से पहले ही प्रभावित क्षेत्रों में 5,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में से केवल 60 यूनिट पूरी तरह से काम कर रही थीं। इस पूरी स्थिति के बारे में विस्तार से जानने के لیے आप ReliefWeb रिपोर्ट पढ़ सकते हैं.

फंड की कमी और समुद्री रास्ते से पलायन

अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मदद के लिए आने वाले फंड की भारी कमी पर गहरी चिंता जताई है। नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल के अनुसार, मानवीय सहायता के लिए जरूरी संसाधनों में 80 प्रतिशत की कमी बनी हुई है, जिससे राहत कार्यों में रुकावट आ रही है। इस बारे में अधिक जानकारी इस अपडेट में देखी जा सकती है। देश के अंदर चल रहे संघर्ष के अलावा पिछले एक हफ्ते के भीतर लगभग 3,000 लोगों ने समुद्री रास्ते से यमन छोड़कर जिबूती की तरफ पलायन किया है। इससे वहां के स्थानीय लोगों पर भी दबाव बढ़ गया है जो पहले से ही शरणार्थियों की भारी भीड़ संभालने में लगे हुए हैं। इस्लामिक रिलीफ, CARE और UNFPA जैसे सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि इन हालात के कारण हैजा फैलने का खतरा, गंभीर भूखमरी और महिलाओं के नेतृत्व वाले परिवारों के लिए मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं.

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