यमन भूख संकट: अदन में विस्थापितों को मिली 3,240 राहत टोकरियां

अदन (यमन): यमन में भूख लगातार फैल रही है, और इसी बीच किंग सलमान ह्यूमैनिटेरियन एड एंड रिलीफ सेंटर (KSrelief) ने अदन के खोर मक्सर ज़िले में विस्थापित परिवारों के बीच 3,240 खाद्य टोकरियां बांटी हैं। यह वितरण 12 अक्टूबर 2026 को हुआ और एक आपातकालीन राहत परियोजना का हिस्सा है, जिसे स्थानीय साझेदारों के ज़रिए चलाया जा रहा है।
जिन परिवारों तक यह मदद पहुंची, उनमें से ज़्यादातर को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है। लड़ाई फिर से भड़कने के बाद हालात और बिगड़े हैं। ऐसे में खाने का एक-एक पैकेट कई परिवारों के लिए सीधे-सीधे दिन की रोटी का सवाल बन गया है।
हालात कितने गंभीर हैं
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की रिपोर्ट बताती है कि यमन में हर चार में से तीन परिवार अपनी बुनियादी खाद्य ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहे, जो इस साल का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। WFP के कार्यक्रम संचालन की सहायक कार्यकारी निदेशक मैथ्यू हॉलिंग्सवर्थ के अनुसार भूख का यह संकट तेज़ी से बढ़ रहा है। उनके मुताबिक करीब 1.83 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
बच्चों की स्थिति और भी चिंताजनक है। लगभग 22 लाख बच्चे पांच साल से कम उम्र में तीव्र कुपोषण के शिकार हैं, जिनमें से 5 लाख बच्चों की हालत गंभीर है। अकेले अदन में जनवरी से जुलाई 2026 के बीच गंभीर कुपोषण के 7,339 मामले दर्ज किए गए।
विस्थापन भी तेज़ी से बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के यमन में मिशन प्रमुख अब्दुसत्तोर एसोएव ने बताया कि सितंबर में हिंसा बढ़ने के बाद 2 लाख 13 हजार से ज़्यादा लोग अपने घर छोड़ चुके हैं, और इनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार अगस्त की शुरुआत से देशभर में 2 लाख 16 हजार लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से 1 लाख 72 हजार लोग तइज़ गवर्नरेट से हैं।
मदद पूरी पड़ती क्यों नहीं दिख रही
संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार अब तक करीब 1 लाख 43 हजार लोगों तक आपातकालीन सहायता पहुंचा पाए हैं। लेकिन अदन के शिविरों में उपलब्ध मदद ज़रूरत के 20 प्रतिशत से भी कम हिस्से को पूरा कर पा रही है। फंडिंग सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। 2026 में 1.2