यमन में गहराया गंभीर भूख का संकट, लाखों लोग हुए प्रभावित

यमन में चल रहे भीषण संघर्ष ने एक बार फिर आम जनजीवन को तबाह कर दिया है, जिससे देश में खाद्य सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले बहुसंख्यक परिवार अपनी बुनियादी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी असमर्थ हैं। हिंसा और विस्थापन के इस दौर ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है, जिससे हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं।
लाखों लोग हुए बेघर और मजबूर
हालिया संघर्ष के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से बड़े पैमाने पर लोगों को अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के आंकड़ों के मुताबिक, ताजा झड़पों की वजह से हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं। विस्थापन के इन नए मामलों ने मानवीय सहायता कर्मियों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि कई इलाकों में लगातार जारी तनाव के कारण राहत सामग्री पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है।
बाजारों में महंगाई का तांडव और खाद्य पदार्थों की किल्लत
संघर्ष का सीधा असर स्थानीय बाजारों और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है, जिससे जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। खासकर गेहूं और आटे जैसी बुनियादी खाद्य सामग्रियों की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, मानवीय सहायता संगठनों के पास फंड की भारी कमी बनी हुई है। हालात से निपटने के लिए संगठनों को अपने मौजूदा संसाधनों का ही दोबारा समायोजन करना पड़ रहा है, ताकि किसी तरह आपातकालीन जरूरतों को पूरा किया जा सके।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार
संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते पर्याप्त वित्तीय सहायता और सुरक्षित पहुंच नहीं मिली, तो यह संकट और अधिक भयावह रूप ले सकता है। लाखों बच्चों और परिवारों को कुपोषण तथा भुखमरी से बचाने के लिए तत्काल प्रभाव से बड़े पैमाने पर मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है। साथ ही, राहत कार्यों में बाधाओं को दूर करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज किए जाने पर भी जोर दिया जा रहा है।