यमन के विदेश मंत्री का दावा: हूतियों के साथ ईरान के 14 और हिजबुल्लाह के 7 एक्सपर्ट
यमन के विदेश मंत्री ने खुलासा किया कि हूती समूह के साथ ईरानी और हिजबुल्लाह विशेषज्ञ काम कर रहे हैं, जिससे सैन्य तनाव बढ़ा है।

सना: यमन के विदेश मंत्री ने ईरानी हस्तक्षेप और हूती विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हूती समूह के साथ 21 विदेशी विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं, जो उनके सैन्य ऑपरेशन्स की योजना बनाने और उन्हें चलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
विदेश मंत्री के मुताबिक, इन विशेषज्ञों में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के 14 सदस्य और लेबनानी हिजबुल्लाह के 7 प्रतिनिधि शामिल हैं। ये विदेशी तत्व यमन की जमीन का इस्तेमाल ईरानी शासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।
इस सैन्य तनाव के कारण अब तक 2 लाख 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि इन विदेशी विशेषज्ञों की मौजूदगी ने हूतियों की क्षमता को इतना बढ़ा दिया है कि अब वे पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों के लिए खतरा बन गए हैं।
मानवीय संकट पर चिंता जताते हुए उन्होंने ताइज़ की घेराबंदी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस घेराबंदी की वजह से स्वास्थ्य सुविधाएं बंद हो गई हैं और जरूरी दवाओं के आयात पर रोक लग गई है। हूती समूह आम नागरिकों और मरीजों के लिए सुरक्षित गलियारों को बंद रखे हुए हैं।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि हूतियों द्वारा बच्चों की भर्ती जारी है और वे नियमित रूप से अंधाधुंध तरीके से एंटी-पर्सनल माइन्स (बारूदी सुरंगें) बिछा रहे हैं। उन्होंने हूतियों से पैदा होने वाले खतरे को अल-कायदा और आईएसआईएस से भी अधिक खतरनाक बताया है।
विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि हूतियों को एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूह घोषित किया जाए। साथ ही उन्होंने हूती बलों को मिल रहे विदेशी हथियारों, तकनीक और विशेषज्ञों की मदद को तुरंत रोकने की मांग की है।