यमन में सरकारी नियंत्रण के लिए बड़ा सैन्य अभियान शुरू

यमन की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ा मोड़ आ गया है। देश के प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) के चेयरमैन और सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर रशाद अल-अलिमी ने पूरे देश में सरकारी संस्थानों को वापस लेने और अपनी सत्ता को फिर से स्थापित करने के लिए आधिकारिक रूप से सैन्य अभियानों की शुरुआत कर दी है। इस कदम से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ चल रहे संघर्ष में तनाव काफी बढ़ गया है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर फोकस
यमन की सेना द्वारा चलाए जा रहे इन अभियानों की रूपरेखा सऊदी अरब के साथ मिलकर बनाई गई रणनीतिक योजना के तहत तैयार की गई है। इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य उन महत्वपूर्ण इलाकों को मुक्त कराना है, जिन पर लंबे समय से हूती ताकतों का कब्जा रहा है। खास तौर पर रेड सी (लाल सागर) के तटीय इलाकों और रणनीतिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर सुरक्षा और नियंत्रण मजबूत करने की योजना बनाई गई है।
मानवीय गलियारों की सुरक्षा और आम नागरिकों की प्राथमिकता
अपने औपचारिक ऐलान में चेयरमैन रशाद अल-अलिमी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस मिशन का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय संप्रभुता को बचाना है। इसके साथ ही, अभियान के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता मार्गों (ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर) को सुरक्षित रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है ताकि किसी भी आम इंसान को भारी परेशानी का सामना न करना पड़े।
हूती लड़ाकों के लिए आम माफी का ऐलान
पिछले दिनों सामान्य लामबंदी के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए, सरकार ने हूती विद्रोहियों के लिए एक बार फिर आम माफी की घोषणा की है। जो लड़ाके हिंसा का रास्ता छोड़कर वापस लौटना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षित वापसी का भरोसा दिया गया है। प्रशासन ने देश के सभी नागरिकों से सशस्त्र बलों और सुरक्षा तंत्र का समर्थन करने की अपील की है ताकि देश में शांति और व्यवस्था की बहाली जल्द से जल्द संभव हो सके।