यमन में सरकार की वापसी तय, राष्ट्रपति परिषद के चेयरमैन ने कहा राज्य संस्थानों को फिर से बहाल करना हर हाल में जरूरी.

Aanya5 September 20263 min read24 viewsYemen
यमन में सरकार की वापसी तय, राष्ट्रपति परिषद के चेयरमैन ने कहा राज्य संस्थानों को फिर से बहाल करना हर हाल में जरूरी.

यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (Presidential Leadership Council) के चेयरमैन ने देश में एक बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि देश के सभी सरकारी संस्थानों को वापस अपने अधिकार में लाना और उन्हें फिर से शुरू करना अब एक ऐसा फैसला है जिसे बदला नहीं जा सकता है। इसके लिए चाहे कितनी भी बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े, सरकार पीछे नहीं हटेगी। इस आधिकारिक घोषणा के बाद से देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आम लोगों के बीच भी इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि आने वाले दिनों में हालात कैसे बदलेंगे। सरकार चाहती है कि देश में कानून का राज फिर से कायम हो और आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सैन्य बलों को मिले कड़े निर्देश

इस पूरे मामले पर बात करते हुए चेयरमैन ने देश की सेना और सैन्य बलों (military forces) को साफ निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि सभी सैनिक अपने ऑपरेशन जारी रखें और अपनी बढ़त को बनाए रखें। इसके साथ ही अलग-अलग सैन्य यूनिटों और फॉर्मेशन के बीच तालमेल को और ज्यादा मजबूत करने की बात कही गई है। सेना को यह भी समझाया गया है कि उन्हें जमीन पर अपनी स्थिति मजबूत रखनी है ताकि देश के बाकी हिस्सों को भी सुरक्षित किया जा सके। सरकार का मानना है कि सशस्त्र बलों ने मैदान में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और वे देश के हर कोने को वापस लेने की पूरी क्षमता रखते हैं।

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हुथी विद्रोहियों को दी कड़ी चेतावनी

चेयरमैन ने हुथी militias (हुथी मिलिशिया) को लेकर भी कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने खुद अपनी मर्जी से यह खतरनाक रास्ता चुना है और अब इसके जो भी बुरे परिणाम सामने आएंगे, उसकी पूरी जिम्मेदारी इन्हीं की होगी। खास तौर पर Taiz (ताइज) शहर का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस इलाके को हुथी विद्रोहियों और उनके समर्थकों के एजेंडे के लिए कभी भी सुरक्षित रास्ता नहीं बनने दिया जाएगा। सरकार का यह भी कहना है कि इन मिलिशिया की गलत रणनीतियों और गलत गणनाओं की वजह से जल्द ही इनका पूरी तरह से पतन हो जाएगा और इन्हें मुंह की खानी पड़ेगी।

आम नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता

युद्ध के इस माहौल में आम नागरिकों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा गया है। सरकार की तरफ से सभी सैन्य बलों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (international humanitarian law) का पूरी तरह से पालन करें। युद्ध के नियमों का सम्मान करते हुए नागरिकों और उनकी संपत्तियों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा विस्थापित हुए लोगों (displaced persons) तक राहत सामग्री और मदद पहुंचाने का काम आसान बनाने को कहा गया है। लड़ाई में घायल होने वाले लोगों के इलाज और उनकीMEDICAL देखभाल का पूरा इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शहीदों के परिवारों का पूरा ध्यान रखने और उनके सभी हक व अधिकार समय पर देने की बात कही गई है।

नागरिकों पर हमलों की कड़ी निंदा

चेयरमैन ने आम रिहायशी इलाकों और सड़कों को निशाना बनाने के लिए सीधे तौर पर हुथी मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि किस तरह से गोलाबारी, स्नाइपर हमलों और ड्रोन हमलों की वजह से आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। इन हमलों के कारण कई लोगों का अपहरण हो चुका है और सैकड़ों परिवारों को अपना घर छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए देश के राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और मीडिया से अपील की गई है कि वे सब मिलकर एक राष्ट्रीय मोर्चा बनाएं। लोगों से यह भी कहा गया है कि वे देश की सेना पर पूरा भरोसा रखें और किसी भी तरह के भ्रम फैलाने वाले या देशद्रोह के आरोपों वाले अभियानों के झांसे में बिल्कुल न आएं। इसके अलावा जनजातियों और हुथी के कब्जे वाले इलाकों में फंसे भटके हुए लोगों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को इस लड़ाई में झोंकना बंद करें और जो लोग अभी भी इन मिलिशिया के साथ जुड़े हैं, वे तुरंत हथियार छोड़कर लड़ना बंद कर दें।

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