यमन में फिर भड़की जंग, जायंट्स फोर्सेस ने वेस्ट कोस्ट फ्रंट पर संभाला मोर्चा और बढ़ा दी अपनी ताकत

यमन में चल रहे संघर्ष ने एक बार फिर से गंभीर रूप ले लिया है और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों में सैन्य गतिविधियों के तेजी से विस्तार के बीच, दक्षिणी जायंट्स फोर्सेस ने वेस्ट कोस्ट फ्रंट पर अपनी अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात कर दिया है। इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस का समर्थन करना और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की आक्रामकता का कड़ाई से जवाब देना है।
विभिन्न मोर्चों पर सैन्य अभियानों का विस्तार
गत 9 सितंबर 2026 को यमन के कई प्रमुख क्षेत्रों में सैन्य अभियान अचानक से काफी ज्यादा बढ़ गए। इस व्यापक सैन्य कार्रवाई के दायरे में ताइज, होदेइदाह, अल-जौफ, अल-बैदा, मारिब, अल-धाले, सादा और मोखा शहर पूरी तरह से शामिल रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना ने अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना शुरू कर दिया है ताकि विद्रोहियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
अल-बैदा और अल-जौफ में सरकारी बलों की बड़ी सफलता
इसी दिन अल-बैदा प्रांत में जायंट्स फोर्सेस ने एक बड़े आक्रामक अभियान की शुरुआत की। इस दौरान बलों ने कई अहम अग्रिम चौकियों और सामरिक रूप से बेहद जरूरी इलाकों पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया। इस कड़ी कार्रवाई के बाद हूती लड़ाकों को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। इतना ही नहीं, सुरक्षा बलों ने इलाके में हूती सेना के एक वाहन को पूरी तरह तबाह कर दिया जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। दूसरी तरफ, यमन की सरकारी सेना ने अल-जौफ प्रांत में भी उल्लेखनीय प्रगति की जानकारी दी और महत्वपूर्ण अल-यतामा क्षेत्र को अपने कब्जे में दोबारा ले लिया। इसके अलावा सेना ने मध्य प्रांत मारिब में भी हूती लड़ाकों के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है।
हूती मीडिया का दावा और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी
इस भारी सैन्य हलचल और हमलों के जवाब में हूती नियंत्रित मीडिया ने मारिब, अल-जौफ, ताइज और होदेइदाह में कुल 32 सऊदी हवाई हमलों की बात कही। समूह की तरफ से यह भी बताया गया कि हेस इलाके में हुई गोलाबारी की वजह से दो आम नागरिकों की जान चली गई। नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस के प्रवक्ता सादिक दुवैद ने इन झड़पों को ईरान के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ सीधी लड़ाई करार दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से यह अटकलें भी तेज हो गई हैं कि सरकार देश की राजधानी सना को वापस अपने नियंत्रण में लेने के लिए किसी बड़े अभियान की तैयारी कर रही है।
यमन के उप रक्षा मंत्री मेजर जनरल समीर अल-सबरी ने इस बात की पुष्टि की है कि सरकार की तरफ से सना को वापस लेने का औपचारिक फैसला लिया जा चुका है। यमन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-नुजैली ने अल-जौफ और अल-बैदा के मोर्चों पर लगातार मिल रही सफलताओं की जानकारी साझा की और हूती सदस्यों से अपने मौजूदा ठिकानों को तुरंत खाली करने की अपील की। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने बताया कि सरकारी बलों ने एक बार फिर से कई विवादित प्रांतों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इस अचानक आई तेजी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के यमन में विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने गहरी चिंता जताई है और इसे बेहद खतरनाक बताते हुए आम नागरिकों पर पड़ने वाले इसके गंभीर मानवीय परिणामों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है।