यमन के सूचना मंत्री ने परिवारों से अपने बच्चों को हूती विद्रोहियों के युद्ध में न भेजने की अपील की

साना: यमन के सूचना मंत्री ने देश के परिवारों को कड़ी चेतावनी देते हुए उनसे तेहरान के प्रभाव को खारिज करने को कहा है। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि तेहरान से शुरू होने वाला कोई भी प्रोजेक्ट इतना कीमती नहीं है कि उसके लिए बच्चों को खो दिया जाए या यमन के युवाओं को हूती विद्रोहियों के युद्ध में ईंधन की तरह इस्तेमाल होने दिया जाए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन के संघर्ष में ईरान की भूमिका की कड़ी निंदा की जा रही है। इसी बीच 20 अक्टूबर 2026 को हूती विद्रोहियों ने ताइज़ के एक रिहायशी इलाके में हमला किया, जिसमें दो किशोर लड़कियों की मौत हो गई।
हूती हमले के जवाब में यमन की सरकारी सेना ने ताइज़ गवर्नरट में हूती ठिकानों पर 13 हवाई हमले किए। इस पूरे मामले में ईरान की भूमिका को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर काफी नाराजगी है।
इससे पहले 19 अक्टूबर को यमन की विदेश मंत्री अफराह अल-ज़ौबा ने विवाद को सुलझाने के लिए ईरान के मध्यस्थता के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अल-ज़ौबा ने तेहरान पर आरोप लगाया कि वह हूती मिलिशिया को हथियार देकर युद्ध को लंबा खींच रहा है। उन्होंने कहा कि जब ईरान खुद एक पक्ष का समर्थन कर रहा है, तो उसकी मध्यस्थता करने की कोई साख नहीं है।
विदेश मंत्री ने ईरानी सरकार से अपना सैन्य समर्थन वापस लेने और यमन की संप्रभुता का सम्मान करने की मांग की। उन्होंने 18 अक्टूबर को भी तेहरान को इस संघर्ष का एक सक्रिय हिस्सा बताया था।
यमन में सऊदी राजदूत मोहम्मद अल-जाबर ने भी 20 अक्टूबर को आरोप लगाया कि ईरान समर्थित मिलिशिया सरकारी राजस्व का इस्तेमाल बुनियादी सेवाओं के बजाय यमन के लोगों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिए कर रहा है।
इसी दिन सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक औपचारिक चेतावनी जारी की है। गठबंधन ने कहा है कि हूती बल हथियारों, मिसाइलों और सैन्य उपकरणों की तस्करी के लिए पारंपरिक नावों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा है।