यमन में युद्ध और हवाई अड्डों पर हमलों के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीज फंसे, इलाज के लिए विदेश जाना हुआ मुश्किल

Nura Basta20 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन में युद्ध और हवाई अड्डों पर हमलों के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीज फंसे, इलाज के लिए विदेश जाना हुआ मुश्किल

साना: यमन में जारी संघर्ष और हवाई अड्डों के बंद होने की वजह से गंभीर रूप से बीमार मरीज अपने देश में ही फंस गए हैं। हवाई यात्रा ठप होने और प्रमुख ट्रांजिट केंद्रों पर हमलों के खतरे ने हजारों लोगों के लिए विदेश में जरूरी इलाज कराना नामुमकिन बना दिया है। सड़क मार्ग से यात्रा करना भी अब बहुत खतरनाक हो गया है। जनवरी में एक व्यक्ति की मौत तब हो गई जब वह मेडिकल इवैक्युएशन के लिए अदन हवाई अड्डे जाने की कोशिश कर रहा था।

अनुमान है कि करीब 2.5 लाख मरीजों को विशेष इलाज के लिए विदेश जाने की जरूरत है। साना में हूती नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले एक दशक में हवाई अड्डों के बार-बार बंद होने से लगभग 4 लाख मरीज प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में 1,600 से ज्यादा तरह की दवाओं की भारी किल्लत है।

साना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के महानिदेशक खालिद अल-शेइफ ने 19 अक्टूबर 2026 को इस नाकाबंदी को युद्ध अपराध बताया। उन्होंने जानकारी दी कि युद्ध से पहले सालाना 25 लाख यात्री सफर करते थे, जो हाल के समय में घटकर केवल 50 हजार रह गए हैं। साना हवाई अड्डा नियमित व्यावसायिक उड़ानों के लिए बंद है, जबकि जुलाई 2026 में सऊदी समर्थित सरकारी बलों ने इसके रनवे पर हमला किया था।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाले अदन हवाई अड्डे पर भी सुरक्षा का खतरा मंडरा रहा है। अक्टूबर 2026 में यहां दो मिसाइल हमले हुए। 16 अक्टूबर को हुए हमले में दो मिसाइलें काहिरा जाने के लिए तैयार एक यिमेनिया एयरवेज विमान से महज 500 मीटर की दूरी पर गिरीं।

क्षेत्रीय तनाव का असर अन्य जगहों पर भी दिखा है। 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला हुआ और 16 अक्टूबर को यनबू के ऊपर एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोका गया। अमेरिकी विदेश विभाग ने 10 और 15 अक्टूबर 2026 को यमन के लिए 'लेवल 4: यात्रा न करें' की चेतावनी जारी की है, जिसमें आतंकवाद, लैंडमाइन्स और स्वास्थ्य जोखिमों का हवाला दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बताया कि तइज़ में बढ़ती हिंसा ने लोगों को और अलग-थलग कर दिया है, जिससे जरूरी सामान और चिकित्सा सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। वहीं 19 अक्टूबर 2026 तक सैन्य गतिविधियां जारी हैं और शबवा प्रांत के अल-अलम सैन्य शिविर पर हूती हमले में कम से कम 20 सऊदी समर्थित यमनी सैनिक मारे गए हैं।

Share:

Comments

Leave a comment