यमन के राष्ट्रपति रशाद अल-अलिमी का बड़ा ऐलान, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नहीं करने देंगे कब्जा

यमन के राष्ट्रपति पद के नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलिमी ने 4 सितंबर और 5 सितंबर 2026 को यह स्पष्ट घोषणा की कि उनका देश किसी भी परिस्थिति में ईरानी शासन और उसके हूती प्रॉक्सी को रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर कब्जा नहीं करने देगा। अल-अलिमी ने हूती आंदोलन पर यह भी आरोप लगाया कि वे सैन्य प्रभुत्व हासिल करने के लिए नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। यमन सरकार का यह कड़ा रुख ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा 3 सितंबर 2026 को शुरू किए गए एक बड़े हमले के बाद सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।
हूती विद्रोहियों के हमलों से यमन में भारी तबाही और मौतें
हूती विद्रोहियों ने तटीय क्षेत्रों में व्यापक जमीनी अभियानों के साथ-साथ रॉकेट और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी थी। 4 सितंबर तक चली इस भीषण लड़ाई में कम से कम 90 लोगों की जान चली गई, जिसमें 40 सरकारी सैनिक और 50 हूती लड़ाके शामिल थे। कुछ रिपोर्ट्स में तो कुल हताहतों की संख्या 120 से अधिक बताई गई है। इन हमलों का जवाब देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने 4 सितंबर को युद्धक विमानों के जरिए होगेदिदाह और ताइज़ प्रांतों में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए।
मोखा शहर को घेरने की कोशिश और सामरिक महत्व
वर्तमान में हूती विद्रोही सरकार के नियंत्रण वाले बंदरगाह शहर मोखा को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं और बाब अल-मंदेब से सटे इलाकों की तरफ लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इस समूह ने लाल सागर के पास सरकारी बलों की निगरानी वाली ऊंची जगहों पर पहले ही कब्जा जमा लिया है। ये सारी गतिविधियां यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एरियानी द्वारा 19 अगस्त 2026 को दी गई उन चेतावनियों की याद दिलाती हैं, जिसमें उन्होंने बताया था कि हूती विद्रोही सैन्य निर्माण कर रहे हैं और रणनीतिक द्वीपों तथा तटीय क्षेत्रों पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं।
हार्मूल जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
हार्मूल जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव के बीच बाब अल-मंदेब का रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा बढ़ गया है। किंग्स कॉलेज लंदन के सुरक्षा विशेषज्ञ एंड्रियास क्रीग ने 4 सितंबर को यह बात कही थी किार्मूल जलडमरूमध्य को लेकर एक संभावित सीमित शिपिंग समझौता संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है। इस बीच, यमन सरकार को सऊदी अरब का पूरा समर्थन मिल रहा है, जिसने हूती विद्रोह का मुकाबला करने के लिए ताइज़ सहित कई क्षेत्रों में अपनी सेना के अतिरिक्त जवानों और सैन्य उपकरणों को भेजने के आदेश दे दिए हैं।