Yemen Crisis: लाल सागर तट पर भीषण जंग तेज, हुती विद्रोहियों के हमले से मची तबाही

Aanya13 September 20263 min read57 viewsYemen
Yemen Crisis: लाल सागर तट पर भीषण जंग तेज, हुती विद्रोहियों के हमले से मची तबाही

यमन के लाल सागर तट पर 13 सितंबर 2026 को हालात उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गए जब हुती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकारी सैनिकों के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए। इस ताजा और तेज सैन्य कार्रवाई में हुती बलों ने बचे हुए लाल सागर के तटीय इलाकों और रणनीतिक ठिकानों पर अपना कब्जा जमा लिया है, जिसमें मयुन द्वीप भी शामिल है। इन इलाकों पर नियंत्रण पाने के बाद बाब अल-मदब शिपिंग लेन पर उनका शिकंजा और अधिक कस गया है। इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए यमनी सरकार की सेनाओं ने सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थन में ताइज क्षेत्र में हुती ठिकानों पर तीन हवाई हमले किए और मोचा शहर में भी लड़ाकों को निशाना बनाया। वरिष्ठ यमनी सरकारी अधिकारी सुल्तान अल-अरादा ने इस इलाके के नुकसान को बेहद दर्दनाक और अफसोसजनक बताया और कहा कि सरकारी सैनिक फिर से एकजुट होकर अपने अभियानों को दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।

गंभीर मानवीय संकट और विस्थापन

इस संघर्ष के कारण क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है। हिंसा के इस ताजा दौर में अब तक 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। मानवीय निगरानी संगठनों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते के दौरान ही 900 से ज्यादा लोग या तो मारे गए हैं या फिर घायल हुए हैं। इसके अलावा लगभग 5,000 परिवार अपना घर-बार छोड़कर जाने को मजबूर हुए हैं। इनमें से 1,400 लोग ऐसे हैं जो पिछले 24 घंटों के भीतर ही अपनी जान बचाकर जिबूती भाग गए हैं। इस नए सिरे से भड़के संघर्ष की वजह से जिबूती में शरण लेने वाले कुल लोगों का आंकड़ा 2,000 के पार पहुंच गया है। राहत एजेंसियों के लिए इन विस्थापित लोगों को संभालना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले

बीती रात यानी 12 और 13 सितंबर की दरमियानी रात को हुती सेना के प्रवक्ता याहया सारी ने दक्षिणी सऊदी अरब के शरूराह प्रांत में स्थित एक सैन्य बेस पर ड्रोन और मिसाइल से हमले करने की जिम्मेदारी ली। उनका दावा था कि इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य हथियारों के गोदाम और कमांड सेंटर थे। हालांकि, सऊदी सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने पुष्टि की कि उसी दौरान सीमा के पास स्थित अल-तव्वाल गवर्नरट में हुती का एक प्रोजेक्टाइल आ गिरा, जिससे दो आम नागरिक घायल हो गए और एक स्थानीय मस्जिद तथा अन्य इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। शरूराह में सायरन जरूर बजाए गए थे, लेकिन वहां किसी भी तरह के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई।

अंतरराष्ट्रीय चिंता और पृष्ठभूमि

साल 2022 में हुए संघर्षविराम के टूटने के बाद यमन के लिए यह सबसे घातक दौर माना जा रहा है। हिंसा का यह दौर ऐसे समय में शुरू हुआ है जब यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने 10 सितंबर 2026 को ही सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की थी। इस मामले पर यूनाइटेड किंगडम ने 10 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने बयान देते हुए हुती द्वारा फिर से जंग शुरू करने के फैसले की कड़ी निंदा की। साथ ही, यूके ने इन हमलों के खिलाफ सऊदी अरब और यमन सरकार के अपनी संप्रदाय और सीमाओं की रक्षा करने के अधिकार का पूरा समर्थन किया। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए यूके सरकार के आधिकारिक बयान को देखा जा सकता है। ईरान समर्थित हुती समूह ने 12 साल पहले सना पर कब्जा कर लिया था और रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से लगातार हथियार और ट्रेनिंग मिल रही है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। इस पूरी स्थिति पर नजर रखने वाली रिपोर्ट्स के अनुसार, संकट की विस्तृत जानकारी रिलीफवेब की रिपोर्ट में दी गई है।

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