यमन में बढ़ा हूती विद्रोहियों का हमला, दो हज़ार से ज्यादा लोग जान बचाकर जिबूती भागे.

यमन में चल रहे भीषण संघर्ष और हिंसा के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ पिछले कुछ दिनों में 2,000 से ज्यादा लोग अपना घर-बार छोड़कर पड़ोसी देश जिबूती पहुँच चुके हैं। हूती लड़ाकों की तरफ से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास अपनी पकड़ लगातार मजबूत की जा रही है जिसके कारण आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें मजबूरन पलायन करना पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन यानी IOM के आंकड़ों के मुताबिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और आने वाले दिनों में विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या में और ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है क्योंकि हालात अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं।
जिबूती के मंत्री ने दी आधिकारिक जानकारी
जिबूती के अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्री इलियास मौसा दावालेह ने गत 13 सितंबर 2026 को यह आधिकारिक जानकारी साझा की थी कि लगभग 1,400 लोगों ने महज चौबीस घंटे के भीतर देश की सीमा में प्रवेश किया है। इससे पहले ठीक दो दिन पहले यानी शुक्रवार 11 सितंबर 2026 को भी मंत्री दावालेह ने तटीय शहर ओबोक में 500 शरणार्थियों के पहुँचने की पुष्टि की थी जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे। इन सभी लोगों को समुद्र के बीच में उस समय बचाया गया जब उनकी नावों का ईंधन पूरी तरह से खत्म हो गया था और वे बीच मझधार में फंस गए थे।
IOM के अधिकारियों ने दी चेतावनी
अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन में मानवीय प्रतिक्रिया समन्वयक सफिया इब्राहिम ने इन सभी जरूरतमंद और पीड़ित समूहों के ओबोक पहुँचने की पूरी पुष्टि की है और साथ ही यह गंभीर चेतावनी भी जारी की है कि आने वाले समय में शरणार्थियों के आने का सिलसिला और ज्यादा तेज हो सकता है। यह पूरा विस्थापन हूती समूह के एक आक्रामक सैन्य अभियान के बाद शुरू हुआ है जिसके तहत गत 10 सितंबर 2026 को मोचा बंदरगाह शहर पर कब्जा कर लिया गया था और उसके ठीक अगले दिन यानी 11 सितंबर तक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के तटीय इलाकों तथा मय्युन द्वीप जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया गया। इस पूरे सैन्य अभियान के कारण मकबना, जबल हबाशी और अल-माआफिर क्षेत्रों के पूरे के पूरे गाँव खाली हो चुके हैं और लोग अपनी जान बचाकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागने को मजबूर हैं।
लाखों लोगों पर मंडरा रहा है संकट
संगठन की तरफ से साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार गत सप्ताह के दौरान पूरे यमन में संघर्ष की वजह से कम से कम 46,000 लोग विस्थापित हुए थे। इसके अलावा IOM की महानिदेशक एमी पोप ने बताया कि बहुत सारे परिवार बार-बार विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं और उनके लिए जीवन रक्षक मानवीय सहायता पाना भी बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यमन में विस्थापित लोगों की संख्या पिछले एक हफ्ते में चार गुना बढ़ चुकी है और जुलाई महीने से लेकर अब तक कम से कम 76,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। इस हालिया तेजी से उपजे संकट से पहले संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की मार्च 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक जिबूती में पहले से ही 36,000 से अधिक पंजीकृत शरणार्थी और शरण चाहने वाले लोग रह रहे थे जो मुख्य रूप से यमन, इथियोपिया और सोमालिया जैसे देशों से ताल्लुक रखते हैं।