यमन का बड़ा ऐलान: अब ईरान का 'मोहरा' बनकर नहीं रहेगा देश

यमन ने क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ लेते हुए यह साफ कर दिया है कि वह अब ईरान के रणनीतिक हितों को साधने वाला कोई जरिया या 'प्रॉक्सी' नहीं बनेगा। यमन की विदेश मंत्री अफराह अल-ज़ौबा ने 8 अक्टूबर, 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यमन प्रशासन अब किसी बाहरी शक्ति के कार्ड के रूप में इस्तेमाल नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का पूरा ध्यान अब देश में राज्य के अधिकार को फिर से स्थापित करने पर है, क्योंकि तनाव कम करने के सभी प्रयास अब खत्म हो चुके हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी साफ किया कि भविष्य की किसी भी राजनीतिक प्रक्रिया में सरकारी संस्थानों की बहाली प्राथमिकता होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय हथियारों, युद्ध और शांति से जुड़े फैसलों पर केवल सरकार का ही नियंत्रण होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने सशस्त्र समूहों के साथ किसी भी तरह के सत्ता-साझाकरण (power-sharing) समझौते को सिरे से खारिज कर दिया है। अल-ज़ौबा के अनुसार, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नेविगेशन तभी संभव है जब तटरेखा पर सरकार का पूरा नियंत्रण हो। इस कठिन समय में उन्होंने सऊदी अरब द्वारा दिए जा रहे राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक समर्थन की सराहना भी की।
हूती हमलों से सऊदी अरब में हड़कंप, अमेरिका ने जताई चिंता
एक तरफ जहां यमन सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही है, वहीं दूसरी ओर हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमलों में तेजी ला दी है। हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को तीसरी बार निशाना बनाया है। इसके अलावा नजरान के हवाई अड्डों और खमीस मुशैत के एक एयरबेस पर भी हमले किए गए। सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अब्हा और किंग खालिद एयरपोर्ट पर हुए इन हमलों में तीन नागरिकों की मौत हुई और कम से कम 36 लोग घायल हुए। इस सुरक्षा संकट के कारण लुफ्थांसा और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइनों को अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित करनी पड़ीं।
इस हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका ने हूतियों को इस पूरे संघर्ष का जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका ने मांग की है कि हूती विद्रोही कब्जा किए गए क्षेत्रों से तुरंत पीछे हटें और ईरान से मिल रही मदद को बंद किया जाए। साथ ही, अमेरिकी अधिकारियों ने सऊदी अरब में मौजूद अपने नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है।
क्षेत्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता देख यूरोपीय संघ ने लाल सागर में अपने नौसैनिक मिशन का विस्तार करने का निर्णय लिया है। वहीं, 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के तहत सऊदी सेना की मदद से यमनी सेना ने बड़ी कार्रवाई की है। सेना का दावा है कि उन्होंने 2,103 ऑपरेशनों में 1,860 हूतियों को ढेर कर दिया है और पश्चिमी ताइज़ में अपनी स्थिति मजबूत की है। इस बीच, कतर ने सऊदी बुनियादी ढांचे पर हुए हूती हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब के प्रति अपनी एकजुटता जताई है।