यमन में फिर से भड़की जंग, चार साल की शांति टूटी और 900 से ज्यादा लोगों की हुई मौत।

यमन देश में एक बार फिर से सैन्य संघर्ष तेजी से बढ़ गया है, जिसकी वजह से पिछले कुछ महीनों में हालात बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं। जुलाई के महीने से शुरू हुई इस नई लड़ाई की वजह से अब तक 900 से ज्यादा लोग हताहत हुए हैं और कम से कम 76,000 लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगह पर जाना पड़ा है। इस ताजा हिंसा ने पिछले चार साल से चली आ रही शांति को पूरी तरह से खत्म कर दिया है, जिससे आम लोगों की जिंदगी पर बहुत बड़ा संकट आ गया है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुसार, आने वाले दिनों में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
लाखों लोगों का पलायन और सरकारी आंकड़े
International Organization for Migration (IOM) की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है। अकेले Taiz गवर्नरट से लगभग 50,000 लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए पलायन किया है, क्योंकि वहां हूती बलों की गतिविधियां काफी बढ़ गई थीं। इसके अलावा, UN Office for the Coordination of Humanitarian Affairs (OCHA) ने यह बताया कि 24 अगस्त से 3 सितंबर के बीच कुल 728 लोग प्रभावित हुए, जिनमें से अकेले 676 मामले 3 सितंबर के बाद सामने आए जब हिंसा ने विकराल रूप ले लिया था। इस बारे में अधिक जानकारी आप ReliefWeb Report पर देख सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव
यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत Hans Grundberg ने चेतावनी देते हुए कहा है कि देश युद्ध के एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है। हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर Mocha और Bab el-Mandeb Strait के पास के द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इसके जवाब में यमनी सरकारी बलों ने al-Jawf, Marib और al-Bayda में नए मोर्चे खोल दिए हैं। पड़ोसी देश Saudi Arabia में भी इसका असर देखने को मिला, जहां सिविल डिफेंस के प्रवक्ता ने बताया कि 12 सितंबर को जजान क्षेत्र में हुए एक हूती प्रोजेक्टाइल हमले में एक मस्जिद को नुकसान पहुंचा और दो लोग घायल हो गए। विस्थापन और संकट से जुड़ी पूरी रिपोर्ट आप IOM News Portal पर पढ़ सकते हैं।
इस बिगड़ती हुई स्थिति को देखते हुए IOM की महानिदेशक Amy Pope ने सभी युद्धरत पक्षों से अपील की है कि वे आम नागरिकों की सुरक्षा करें और राहत कर्मियों के लिए सुरक्षित मानवीय पहुंच सुनिश्चित करें ताकि जरूरतमंदों तक समय पर मदद पहुंचाई जा सके।