यमन में बड़ा हमला, हुती विद्रोहियों का आक्रामक रुख नाकाम, सेना ने गिराया सुसाइड ड्रोन.

यमन के कहुब इलाके में इन दिनों हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं और सुरक्षा बलों ने एक बार फिर से अपनी ताकत का अहसास कराया है। 19 सितंबर 2026 को हुई भीषण झड़प में 'शील्ड ऑफ द नेशन' फोर्सेस के जवानों ने हुती विद्रोहियों के एक बड़े हमले को पूरी तरह से विफल कर दिया। पिछले कई घंटों से चल रही इस रक्षात्मक कार्रवाई के दौरान दुश्मन सेना के पसीने छूट गए और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से क्षेत्रीय सुरक्षा और वहां चल रहे संघर्ष की गंभीरता को सबके सामने ला दिया है।
कहुब क्षेत्र में तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली भीषण जंग
मिली जानकारी के अनुसार, कहुब के मोर्चे पर 'शील्ड ऑफ द नेशन' फोर्सेस की पहली डिवीजन की तीसरी ब्रिगेड के जांबाज सैनिकों ने अपनी चौकसी का बेहतरीन परिचय दिया। हुती मिलिशिया की तरफ से लगातार तीन बार रणनीतिक ठिकानों को भेदने की कोशिश की गई थी, जिसे हमारे जवानों ने हर बार नाकाम कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीन घंटे से ज्यादा समय तक बेहद तीव्र और आमने-सामने की लड़ाई चली। इस लंबी और खतरनाक मुठभेड़ में हुती मिलिशिया को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा और उनके कई सैन्य वाहन पूरी तरह से तबाह कर दिए गए।
आत्मघाती ड्रोन को हवा में ही किया गया तबाह
संघर्ष के दौरान स्थिति तब और गंभीर हो गई जब हुती लड़ाकों ने ब्रिगेड के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक सुसाइड ड्रोन हवा में छोड़ दिया। हालांकि, सतर्क सैन्य बलों ने समय रहते खतरे को भांप लिया और उस सुसाइड ड्रोन को बीच हवा में ही सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया। इस इलाके में ड्रोन हमलों की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 17 सितंबर 2026 को इसी मोर्चे पर सदर्न जायंट्स ब्रिगेड ने भी एक 'राजुम' मॉडल के हुती ड्रोन को मार गिराया था। सैन्य नेतृत्व ने इस बात की पुष्टि की है कि सभी सैनिक किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और बेहद सतर्क हैं।
बड़े हुती कमांडर का मारा जाना और मानवीय संकट
जायंट्स फोर्सेस के मीडिया सेंटर के निदेशक असील अल-सकलादी की तरफ से मिली अतिरिक्त रिपोर्ट के अनुसार, बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास 18 सितंबर 2026 को हुई कार्रवाई में हुती मिलिशिया के एक बड़े नेता को ढेर कर दिया गया। मारे गए कमांडर की पहचान मेजर जनरल फराज मोहसिन अल-अस्सर (जिन्हें 'अबू साक्र अल-काफ्र' के नाम से भी जाना जाता था) के रूप में हुई है, जो इब्ब गवर्नरेट से ताल्लुक रखते थे और मोबिलाइजेशन का काम संभाल रहे थे। इस ऑपरेशन में उनके साथ छह अन्य साथी भी मारे गए।
ताइज, लाहिज, मारिब और अल-जावफ जैसे इलाकों में हिंसा और संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बिगड़ते हालात को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय यानी OCHA ने गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने की शुरुआत से लेकर अब तक हुती सैन्य गतिविधियों की वजह से कम से कम 125,000 लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं। आम जनता के बीच इस विस्थापन से स्थिति और भी ज्यादा दयनीय होती जा रही है।