यमन फिर से पूर्ण युद्ध की चपेट में, UN दूत ने सुरक्षा परिषद को दी चेतावनी

यमन में शांति की उम्मीदें एक बार फिर टूटती नजर आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने सुरक्षा परिषद को आगाह किया है कि यमन एक बार फिर पूर्ण पैमाने के युद्ध की स्थिति में पहुंच गया है। ग्रुंडबर्ग ने बताया कि देश के कई मोर्चों पर हिंसा इतनी बढ़ गई है कि सुरक्षा स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। उन्होंने हूती आंदोलन (अंसार अल्लाह) से हमले रोकने की अपील करते हुए कहा कि केवल सैन्य जीत किसी राजनीतिक समाधान का विकल्प नहीं हो सकती।
युद्ध की यह आग अब कई शहरों और इलाकों तक फैल चुकी है। ताइज शहर के पश्चिम और दक्षिण के पहाड़ी इलाकों में भीषण लड़ाई जारी है, जबकि हूतियों ने मोखा और बाब अल-मंडेब तट की ओर बढ़ते हुए लहेज तक अपनी पहुंच बना ली है। इसके जवाब में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने जवाबी हमला शुरू किया है और बाब अल-मंडेब के पास के कुछ इलाकों को वापस हासिल करने का दावा किया है। इसके अलावा मारिब, अल-जौफ और हज्जा में भी तनाव काफी बढ़ गया है।
बढ़ती हिंसा और मानवीय संकट
इस युद्ध का सबसे बुरा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। अगस्त से अब तक हिंसा के कारण 2,00,000 से अधिक लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं, जिनमें से करीब 4,000 लोग जिबूती और सोमालिया भाग गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की याद दिलाते हुए UN दूत ने सभी पक्षों से नागरिकों, चिकित्सा केंद्रों और मानवीय कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
हिंसा की यह लहर केवल यमन तक सीमित नहीं रही। 8 अक्टूबर 2026 को हूतियों ने सऊदी अरब के नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, जिसमें रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में तीन सऊदी नागरिकों की मौत हो गई और कई घायल हुए। साथ ही, लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हूतियों की धमकियों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
सुरक्षा परिषद की बैठक में यमन के प्रतिनिधि अब्दुल्ला अली फदेल अल-सादी ने हूतियों तक पहुंचने वाली फंडिंग और हथियारों पर सख्त पाबंदी लगाने की मांग की। वहीं, सऊदी अरब के प्रतिनिधि अब्दुलअजीज अल-वासिल ने इस खतरनाक वृद्धि के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने जानकारी दी कि गठबंधन बलों ने 136 हूती सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है और वे बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को सुरक्षित कर रहे हैं।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी ने 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' की घोषणा की है, जिसका मुख्य उद्देश्य सना को मुक्त कराना और हूती तख्तापलट को समाप्त करना है।